देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी / पिथौरागढ़ / देहरादून: उत्तराखंड के सर्वांगीण हितों, जन जागरूकता, स्थानीय अधिकारों और प्रमुख क्षेत्रीय मुद्दों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से एक बड़े राज्यव्यापी अभियान ‘उत्तराखंड उत्थान जात्रा’ की घोषणा कर दी गई है। यह यात्रा प्रदेश के विभिन्न जनपदों, पर्वतीय व मैदानी क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए आम जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं को सुनेगी, ताकि जनभावनाओं को आगामी मेनिफेस्टो (घोषणा पत्र) का मुख्य हिस्सा बनाया जा सके। यात्रा के सफल संचालन के लिए विस्तृत रूट चार्ट और प्रबंधन समितियों की घोषणा कर दी गई है।
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11 अक्टूबर को गोल्जयू मंदिर और हीरानगर से होगा ऐतिहासिक आगाज
घोषित रूट प्लान के अनुसार, 11 अक्टूबर को इस जात्रा का भव्य शुभारंभ उत्थान मंच हीरानगर (हल्द्वानी) से किया जाएगा। इसके पश्चात यात्रा सबसे पहले लालकुआं पहुँचेगी, जहाँ वह वन अधिकार संगठन द्वारा चलाए जा रहे सुप्रसिद्ध आंदोलन को अपना खुला समर्थन देगी।
लालकुआं भ्रमण के बाद यात्रा बाईपास नानकमत्ता होते हुए खटीमा पहुँचेगी, जहाँ ऐतिहासिक शहीद स्थल पर पहुंचकर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इसके बाद यात्रा टनकपुर, लोहाघाट और चंपावत के रास्ते होते हुए पहले दिन पिथौरागढ़ में रात्रि विश्राम करेगी।
12 से 17 अक्टूबर तक का संपूर्ण जिलावार रूट और विश्राम स्थल:
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12 अक्टूबर: पिथौरागढ़ से प्रस्थान कर कनालीछीना, ओगला टाउन, धारचूला, डीडीहाट और थल होते हुए यात्रा बेरीनाग पहुँचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम होगा।
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13 अक्टूबर: बेरीनाग से शुभारंभ होकर चौकोड़ी, रीमा, कपकोट तथा बागेश्वर और गरुड़ होते हुए यात्रा कौसानी में रात्रि विश्राम करेगी।
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14 अक्टूबर: कौसानी से चलकर सोमेश्वर, द्वाराहाट, चौखुटिया, मासी, सियालदे और सल्ट होते हुए यात्रा भिकियासैंण पहुँचेगी और वहीं रात्रि विश्राम होगा।
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15 अक्टूबर: भिकियासैंण से आगे बढ़ते हुए भतरोजखान, ताड़ीखेत, रानीखेत, मजखाली, दोलाघट और अल्मोड़ा होते हुए यात्रा बाड़ेछीना, पनुवानोला, जागेश्वर, दन्या और आरतोला पहुँचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम तय किया गया है।
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16 अक्टूबर: आरतोला से प्रस्थान कर लमगड़ा, शहरफाटक, पहाड़पानी, भीमताल, धानाचुली, लेटीबुगा, भटेलिया, नथुआखान, सुयालबाड़ी, गरमपानी, नैनीताल और बेतालघाट होते हुए यात्रा रामनगर में रात्रि विश्राम करेगी।
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17 अक्टूबर: यात्रा के अंतिम दिन यानी 17 अक्टूबर को रामनगर से चलकर बेलपड़ाव और कालाढूंगी के रास्ते यात्रा हल्द्वानी पहुँचेगी, जहाँ एक भव्य एवं विशाल जनसभा के रूप में इस राज्यव्यापी यात्रा का ऐतिहासिक समापन होगा।
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प्रबंधन, समन्वय और प्रचार-प्रसार की कमान वरिष्ठ नेताओं के हाथों में इस संपूर्ण यात्रा को सुचारू रूप से संचालित करने और जन-जन तक पहुँचाने के लिए समिति द्वारा विभिन्न वरिष्ठ पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं:
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समन्वय, संपर्क एवं प्रबंधन: प्रताप सिंह चौहान (जिला अध्यक्ष), राजीव लोचन, और मोहन सिंह नेगी।
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प्रचार एवं प्रसार: भुवन बिष्ट।
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कोष एवं लेखा-जोखा: दिनेश कुंजवाल, कैलाश पांगती, तारा सिंह नेगी, श्याम सिंह नेगी, और उत्तम बिष्ट।
आयोजकों ने बताया कि यह यात्रा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के हर उस कोने की आवाज है जहाँ विकास, रोजगार, जल-जंगल-जमीन और मूल अधिकारों के मुद्दे आज भी प्रासंगिक हैं। यात्रा के दौरान सभी जनपदों से मिले सुझावों और जनता की सीधी आवाज को संकलित कर उसे आगामी मेनिफेस्टो में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
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