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Uttarakhand Legal Concept Representing High Court Decision on Badrinath Donation Theft Case
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देवभूमि जन हुंकार, नैनीताल / देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड के चारधामों में से एक विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दी जाने वाली ‘थाली भेंट’ की गिनती के दौरान चढ़ावा चोरी करने के कथित आरोपों में पिछले कुछ समय से जेल में बंद मंदिर समिति के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिल गई है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद आरोपी प्रमोद नौटियाल की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में इस बहुचर्चित जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई थी।

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वायरल वीडियो और धर्मशाला से 5,000 रुपये की बरामदगी का था मामला

प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, इसी साल श्री बदरीनाथ थाने में प्रमोद नौटियाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316(5), 317(2) और 61(2) के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जाँच और प्राथमिकी के आधार पर आरोप लगाया गया था कि प्रमोद नौटियाल को श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावे के रूप में जमा की जा रही ‘थाली भेंट’ की राशि की गिनती के दौरान कुछ पैसे अपनी जेब में रखते हुए देखा गया था, जिसका एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ था। मामले की तफ्तीश पूरी करने के बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी, जिसमें दावा किया गया कि प्रमोद की निशानदेही पर धाम की एक धर्मशाला के कमरे से 5,000 रुपये बरामद किए गए हैं।

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बचाव पक्ष की दलील— “सार्वजनिक कमरे से दिखाई गई बरामदगी, गिरफ्तारी और बरामदगी में था बड़ा अंतर”

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट के समक्ष जोरदार तर्क रखे। उन्होंने कहा कि प्रमोद पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। वकीलों ने अदालत को बताया कि उनकी गिरफ्तारी 12 जुलाई 2026 को हुई थी, जबकि 5,000 रुपये की कथित बरामदगी गिरफ्तारी के 16 दिन बाद यानी 28 जुलाई 2026 को दिखाई गई। जिस धर्मशाला के कमरे से बरामदगी दर्शाई गई, वह आम लोगों और देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह खुला और सार्वजनिक स्थान था, इसलिए इस बरामदगी को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि प्रमोद देहरादून के स्थायी निवासी हैं और समाज में उनकी गहरी जड़ें हैं, इसलिए उनके भागने या गवाहों को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है। इस मामले में पुलिस जाँच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है, जबकि मुख्य ट्रायल शुरू होने और चलने में अभी लंबा समय लगने की पूरी संभावना है। हालांकि राज्य सरकार के अभियोजन पक्ष ने जमानत का पुरजोर विरोध किया, लेकिन वे इस तथ्य से इनकार नहीं कर सके कि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और कथित बरामदगी गिरफ्तारी के काफी समय बाद की गई है।

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हाईकोर्ट ने तय की कड़ी शर्तें, गवाहों या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने पर रद्द हो सकेगी जमानत

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि चूँकि जाँच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, 5,000 रुपये की बरामदगी एक ऐसे सार्वजनिक कमरे से बताई गई है जो श्रद्धालुओं के लिए सुलभ था, तथा गिरफ्तारी और बरामदगी के बीच स्पष्ट समयांतराल मौजूद है—इन तमाम समग्र तथ्यों और हिरासत की अवधि को देखते हुए अदालत का मानना है कि आवेदक जमानत का हकदार है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रमोद नौटियाल को संबंधित ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बंधपत्र और दो विश्वसनीय जमानतदारों पर रिहा किया जाए। साथ ही अदालत ने उनकी रिहाई के लिए निम्नलिखित कड़ी शर्तें भी निर्धारित की हैं:

  • वह किसी भी व्यक्ति को धमकाएगा, बहलाएगा या प्रभावित नहीं करेगा।

  • अभियोजन साक्ष्य से कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा और गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा।

  • संपूर्ण जाँच और अदालत के ट्रायल में पूरा सहयोग करेगा तथा नियमित रूप से पेश होगा।

  • न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेगा।

  • अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर जाँच अधिकारी व कोर्ट को उपलब्ध कराएगा तथा किसी भी प्रकार के बदलाव की सूचना तुरंत देगा।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कड़ाई से साफ कर दिया है कि यदि आरोपी द्वारा इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन किया जाता है, तो अभियोजन पक्ष उनकी जमानत रद्द कराने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगा।

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By admin