उत्तराखंड हाईकोर्ट
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हल्द्वानी के गौलापार में बनेगा उत्तराखंड हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने जनमत संग्रह का आदेश बदला! 👇

हल्द्वानी/नैनीताल: उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था और आधारभूत विकास से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में स्थानांतरित (Shift) करने का रास्ता अब विधिक रूप से पूरी तरह साफ हो गया है। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने राज्य सरकार के स्थानांतरण संबंधी प्रस्ताव को अपनी अंतिम विधिक मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में उत्तराखंड हाई कोर्ट द्वारा पूर्व में नए परिसर के स्थानांतरण को लेकर जनमत संग्रह (Referendum) कराने के दिए गए विवादास्पद निर्देश को पूरी तरह से निरस्त (Quash) कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस प्रशासनिक व विधिक मामले में किसी भी प्रकार के जनमत संग्रह की कोई आवश्यकता नहीं है।

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6 सप्ताह के भीतर भूमि आवंटन पूरा करने का सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता और समय की महत्ता को देखते हुए उत्तराखंड सरकार को बेहद कड़े और स्पष्ट विधिक निर्देश जारी किए हैं। माननीय अदालत ने राज्य सरकार को पाबंद किया है कि हल्द्वानी के गौलापार में प्रस्तावित हाई कोर्ट भवन के भव्य निर्माण के लिए आगामी छह सप्ताह (6 Weeks) के भीतर भूमि आवंटन (Land Allotment) की सभी विधिक व प्रशासनिक प्रक्रियाएं अनिवार्य रूप से पूरी कर ली जाएं, ताकि इस महा-परियोजना पर बिना किसी देरी के धरातल पर शीघ्र कार्य शुरू किया जा सके।

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क्यों पड़ी स्थानांतरण की जरूरत? गौलापार में बनेगा हाई-टेक न्यायिक परिसर

गौरतलब है कि लंबे समय से उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल के संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी क्षेत्र से हटाकर हल्द्वानी के गौलापार में स्थानांतरित करने की मांग चल रही थी। नैनीताल में बढ़ते ट्रैफिक दबाव, पार्किंग की गंभीर समस्या और भौगोलिक सीमाओं को देखते हुए एक बड़े व आधुनिक परिसर की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

गौलापार क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में सरकारी भूमि उपलब्ध होने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप एक वैश्विक स्तर का आधुनिक न्यायिक परिसर विकसित करने की अपार संभावनाओं को देखते हुए ही धामी सरकार ने वहां नया हाई कोर्ट परिसर बनाने का विधिक प्रस्ताव तैयार कर माननीय अदालत के समक्ष रखा था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

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अधिवक्ताओं और आम जनता के लिए भविष्य की सुविधाजनक व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक लैंडमार्क फैसले के बाद अब गौलापार में समस्त आधुनिक अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं से युक्त, ई-कोर्ट प्रणालियों और विशाल पार्किंग व्यवस्था वाले नए हाई कोर्ट परिसर के निर्माण का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। इस स्थानांतरण से न केवल राज्य की शीर्ष न्यायिक व्यवस्था को बेहतर और अत्याधुनिक आधारभूत ढांचा (Infrastructure) मिलेगा, बल्कि दूर-दराज से आने वाले वादकारियों (आम जनता) और अधिवक्ताओं (वकीलों) को भी भविष्य में आवागमन और विधिक पैरवी में बेहद सुविधाजनक व सुलभ व्यवस्था प्राप्त होगी।

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