देहरादून में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का बड़ा कदम। आँगनबाड़ी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने मानदेय में 140 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि और 10 लाख रिटायरमेंट फंड की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन।
रिपोर्टर -प्रताप सिंह नेगी

देवभूमि जन हुंकार, देहरादून / हल्द्वानी: उत्तराखंड के प्रशासनिक केंद्र देहरादून से कर्मचारी जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। आँगनबाड़ी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा उत्तराखण्ड के बैनर तले प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सेविकाओं ने अपनी लंबित और न्यायसंगत मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मुखर रुख अपना लिया है। संगठन की ओर से जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया गया है, जिसमें मानदेय में बढ़ोतरी, पेंशन और सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सुरक्षा की पुरजोर मांग की गई है।
ज्ञापन के माध्यम से सरकार को अवगत कराया गया है कि उत्तराखंड की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों एवं समस्याओं के समाधान के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर निवेदन करती चली आ रही हैं, किंतु विभाग और सरकार द्वारा लगातार उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। सरकार की इसी उदासीनता के कारण प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों में भारी रोष व्याप्त है। पूर्व में भी कई बार रैलियों और धरना-प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया था, परंतु अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि वर्ष 2024 में मानदेय वृद्धि हेतु जो कमेटी गठित की गई थी, उसका निर्णय भी अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे उनमें निराशा का माहौल है।
आँगनबाड़ी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा उत्तराखण्ड (जिसका नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी, सुशीला खत्री और प्रदेश महामंत्री ममता बादलों द्वारा किया जा रहा है) ने ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित दो सूत्रीय मांगें रखी हैं:
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आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय में राज्य सरकार द्वारा 140 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि की जाए, तथा केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि का प्रस्ताव भेजा जाए।
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आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बिना किसी अर्हता पूरी किए सेवानिवृत्त होने पर 10 लाख रुपये की भारी-भरकम धन राशि प्रदान की जाए, और साथ ही उन्हें पेंशन सुविधा का लाभ दिया जाए।
देहरादून जिलाधिकारी कार्यालय में विधिवत रूप से ज्ञापन सौंपते हुए संगठन ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार उनकी इन जायज मांगों पर संज्ञान लेते हुए तत्काल सकारात्मक कदम उठाएगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान स्थानीय पदाधिकारी व कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। यदि सरकार द्वारा जल्द ही इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जा सकता है।
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