बागजाला : आठवें दिन भी जारी रहा अनिश्चितकालीन धरना, आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन
बागजाला। आठ सूत्रीय मांगों को लेकर बागजाला गांव में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन आठवें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों ने मालिकाना अधिकार देकर गांव को राजस्व गांव घोषित करने, दिए गए नोटिस वापस लेने, निर्माण एवं विकास कार्यों पर लगी रोक हटाने, पंचायत चुनाव का अधिकार बहाल करने, जल जीवन मिशन की योजना चालू करने और आवारा गोवंश की समस्या का स्थायी समाधान करने जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी ने कहा कि वन विभाग गांव के लोगों को डराने-धमकाने का काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वच्छ भारत अभियान के बावजूद विभाग ने गांव के एक व्यक्ति का शौचालय तोड़ दिया, जो बेहद निंदनीय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह गतिविधियां बंद नहीं हुईं तो आंदोलन को डीएफओ कार्यालय तक ले जाना पड़ेगा।
जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय पार्षद मदन मोहन चमोली ने धरने को समर्थन देते हुए कहा कि पतनशील फासीवादी राजनीतिक संस्कृति के खिलाफ जन आंदोलन ही बदलाव का वाहक बन सकता है। उन्होंने कहा कि बागजाला जैसे संघर्ष, पूरे देश में बड़े राजनीतिक-सांस्कृतिक आंदोलन की बुनियाद रख सकते हैं।
भाकपा (माले) के बिंदुखत्ता एरिया सचिव पुष्कर दुबड़िया ने कहा कि जिस प्रकार बिंदुखत्ता जनता के लम्बे संघर्ष से कायम है, उसी तरह बागजाला भी संघर्ष और एकता के बल पर अपने अधिकार हासिल कर सकता है।
धरने के दौरान ग्रामीणों ने “हम होंगे कामयाब”, “ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के” और “लड़ना है भाई ये तो लंबी लड़ाई है” जैसे जनगीत गाकर उत्साह बढ़ाया।
आठवें दिन धरने में किसान नेता हरीश भंडारी, भाकपा (माले) नैनीताल जिला सचिव डा. कैलाश पाण्डेय, जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय पार्षद मदन मोहन चमोली, तथा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
