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भगत सिंह के विचार आज भी प्रासंगिक: ‘साम्राज्यवादी युद्ध और भगत सिंह’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित

देहरादून/बागेश्वर। 22 मार्च 2026 को परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) के आह्वान पर “साम्राज्यवादी युद्ध और भगत सिंह” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। 23 मार्च को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस के पूर्व इस कार्यक्रम के माध्यम से उनके विचारों को याद किया गया। गोष्ठी की शुरुआत “ऐ भगत सिंह तू जिंदा है, हर एक लहू के कतरे में” गीत के साथ हुई, जबकि संचालन पछास के महेश द्वारा किया गया।

गोष्ठी में वक्ताओं ने भगत सिंह और उनके साथियों के विचारों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रखते हुए चर्चा की।

भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, आज दुनिया एक बार फिर साम्राज्यवादी ताकतों के संघर्षों और युद्धों से जूझ रही है. अमेरिका-इजराइल गठजोड़ के नेतृत्व में साम्राज्यवादी शक्तियों ने आर्थिक और सामरिक हितों के लिए ईरान पर हमला कर दिया है. ईरान, वेनेजुएला समेत तमाम देशों की संप्रभुता को ताक पर रखकर पूरी दुनिया को अमेरिकी साम्राज्यवाद युद्ध में झोंक रहा है। विभिन्न देशों में अपने सैन्य अड्डे स्थापित करना, गैस-तेल और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा, हथियारों की होड़ और सैन्य गठबंधनों का विस्तार दुनिया को अस्थिर बना रहा है। पूरी दुनिया के गरीब देशों को नवउपनिवेश बनाने की साम्राज्यवादी मुहिम चल रही है.पछास के चन्दन ने कहा कि हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) ने साम्राज्यवाद को “सबसे बड़ी डकैजनी” बताया था। उन्होंने कहा कि आज भी दुनिया भर में मेहनतकश वर्ग पर शोषण जारी है और वैश्विक स्तर पर चल रहे कई संघर्ष इसी का परिणाम हैं।

मुकेश भंडारी ने अपने वक्तव्य में देश की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों का असर आम जनता पर पड़ा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्र प्रभावित हुए हैं।

प्रकाश जी ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक संघर्षों का असर आम लोगों पर पड़ता है, खासकर ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता और कीमतों पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिलता है। वहीं सुंदर लाल बौद्ध ने युवाओं से अपील की कि वे सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक रहें और सकारात्मक बदलाव की दिशा में काम करें।

रूपाली ने कहा कि भगत सिंह के विचार केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक बुराइयों जैसे जातिवाद और सांप्रदायिकता के भी विरोधी थे। उन्होंने युवाओं से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में जी.आर. टम्टा ने संविधान की मूल भावना को बनाए रखने और समाज में समानता व मानवता के मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया।

इस गोष्ठी में परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास), क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, भाकपा-माले, अंबेडकर मिशन और भीम आर्मी के कई सदस्य व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से महेश, चंदन, अनुराग, रूपाली, हिमानी, विपिन, रेखा खुल्बे, राजेश, अमित, आकाश, मुकेश भंडारी, मनीष, प्रकाश चन्द्र बेरी, टी.आर. पाण्डे, जी.आर. टम्टा, सुंदर लाल बौद्ध, कैलाश पाण्डेय सहित अन्य लोग शामिल रहे।

 


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