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Fri. Oct 9th, 2026
शस्त्र लाइसेंस की होगी दोबारा जांच
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उत्तराखंड में शस्त्र लाइसेंस पर सख्ती: सभी जिलों में होगा व्यापक सत्यापन, रिपोर्ट तलब

देहरादून। प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच उत्तराखंड सरकार ने शस्त्र लाइसेंस व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गृह विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को लाइसेंसों की व्यापक समीक्षा और पुनः सत्यापन कराने के आदेश जारी किए हैं।

गृह सचिव शैलेश बगौली द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपद में शस्त्र लाइसेंस धारकों की गहन जांच कर विस्तृत रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराएं। विशेष रूप से उन लाइसेंसों की जांच पर जोर दिया गया है, जो अन्य राज्यों से ट्रांसफर होकर उत्तराखंड में आए हैं। इसके साथ ही हाल ही में जारी नए लाइसेंस भी जांच के दायरे में रहेंगे।

एक से अधिक शस्त्र पर भी होगी समीक्षा

सरकार ने एक व्यक्ति के पास एक से अधिक शस्त्र होने की स्थिति में उनकी वैधता और अनुमति प्रक्रिया की भी जांच करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था के अनुसार अब दो से अधिक शस्त्र रखने की अनुमति केवल शूटिंग खिलाड़ियों को ही दी जाएगी, वह भी उनके प्रदर्शन के आधार पर तय होगी।

गन हाउस पर भी निगरानी

निर्देशों में गन हाउस की नियमित जांच, उनके स्टॉक का सत्यापन और कारतूस के उपयोग की निगरानी को भी अनिवार्य किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

सरकार का उद्देश्य शस्त्र लाइसेंस के दुरुपयोग को रोकना और प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है।

मुख्य बिंदु और जांच की प्रक्रिया:
  • जांच का दायरा: 2015 के बाद अन्य राज्यों से उत्तराखंड में ट्रांसफर हुए सभी शस्त्र लाइसेंस।
  • विशेष ध्यान: जिन व्यक्तियों के पास एक से अधिक शस्त्र हैं, उनकी गहन जांच की जाएगी।
  • गन हाउस की जांच: सभी जिलाधिकारियों को गन हाउस के स्टॉक की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • कारतूस का उपयोग: लाइसेंस धारक द्वारा खरीदे गए कारतूसों का रिकॉर्ड और उपयोग की जांच की जाएगी।
  • नियम व परिणाम: सत्यापन न होने की स्थिति में लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।

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