बनभूलपुरा हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला और पुलिस कार्रवाई
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हल्द्वानी बनभूलपुरा हिंसा: दो मुख्य आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत रद, सुप्रीम कोर्ट का सरेंडर करने का निर्देश

हल्द्वानी के चर्चित बनभूलपुरा हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपियों को मिली राहत को खत्म कर दिया है। अदालत ने उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा आरोपियों को दी गई डिफॉल्ट जमानत (Default Bail) को रद्द कर दिया और उन्हें तत्काल सरेंडर करने का आदेश दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और फैसला: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने उत्तराखंड सरकार की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि नैनीताल हाईकोर्ट का आदेश कानून और तथ्यों के आधार पर त्रुटिपूर्ण था। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों ने डिफॉल्ट जमानत मांगने का अपना अधिकार खो दिया था क्योंकि उन्होंने समय रहते निचली अदालत के आदेशों को चुनौती नहीं दी थी और अपील के लिए लगभग दो महीने तक प्रतीक्षा की थी।

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क्या है पूरा मामला?

  • हिंसा की तारीख: यह मामला 8 फरवरी 2024 को बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई व्यापक हिंसा से जुड़ा है।

  • नुकसान: इस हिंसा में थाने पर हमला, आगजनी और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया था, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी।

  • आरोपी: हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी जावेद सिद्दीकी, अरशद अयूब और अब्दुल मलिक सहित अन्य को चार्जशीट दाखिल करने में देरी के आधार पर जमानत दी थी।

  • सुप्रीम कोर्ट का आदेश: अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए आदेश दिया है कि जमानत पर बाहर आए सभी आरोपियों को स्थानीय अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।

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