हल्द्वानी: मेटा (Meta) की तानाशाही के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता सुशील भट्ट ने खोला मोर्चा, SSP नैनीताल से शिकायत कर भेजा कानूनी नोटिस
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग वाली पोस्ट के बाद इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट बंद करने का आरोप, वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत परिहार के जरिए कोर्ट जाने की चेतावनी
हल्द्वानी (नैनीताल): उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सुशील भट्ट ने सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) द्वारा उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम और फेसबुक खातों को अचानक बंद किए जाने की दंडात्मक कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नैनीताल को एक आधिकारिक शिकायती पत्र सौंपकर मामले की जांच की मांग की है। इसके साथ ही, सामाजिक कार्यकर्ता ने अपने कानूनी सलाहकार और वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत परिहार के माध्यम से मेटा के भारतीय शिकायत निवारण अधिकारी को एक ऑनलाइन कानूनी नोटिस भी प्रेषित किया है, जिसमें खातों को तुरंत बहाल न करने पर विधिक कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।
पूरे मामले की पृष्ठभूमि साझा करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सुशील भट्ट ने बताया कि उन्होंने हाल ही में देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त विभिन्न गंभीर समस्याओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग संबंधी एक पोस्ट इंस्टाग्राम पर साझा की थी। इसके अलावा, उक्त पोस्ट में उन्होंने इस बात का भी स्पष्ट उल्लेख किया था कि लगभग ११ वर्ष पूर्व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में आंतरिक लोकतंत्र की मांग उठाने पर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। सुशील भट्ट का आरोप है कि इस राजनीतिक और सामाजिक पोस्ट के इंटरनेट मीडिया पर आते ही, ठीक १२ जून २०२६ को उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट @sushilbhatt.official तथा उससे जुड़े फेसबुक अकाउंट को “अकाउंट इंटीग्रिटी” (Account Integrity) का हवाला देते हुए मेटा द्वारा पूरी तरह बंद कर दिया गया।
सुशील भट्ट ने कंपनी के इस रवैए पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मेटा द्वारा उनके सोशल मीडिया खातों को बिना किसी स्पष्ट और ठोस कारण बताए निष्क्रिय किया जाना सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने किसी कथित नीतिगत उल्लंघन के संबंध में न तो उन्हें कोई पर्याप्त स्पष्टीकरण दिया और न ही अपनी बात रखने के लिए किसी प्रभावी सुनवाई का अवसर प्रदान किया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत परिहार के माध्यम से भेजे गए इस कानूनी नोटिस में मेटा से उनके इंस्टाग्राम एवं फेसबुक खातों को तत्काल पुनः सक्रिय करने, पूरे मामले की किसी निष्पक्ष मानवीय समीक्षा (Human Review) कराने, खातों को ब्लॉक किए जाने के विस्तृत कारण लिखित में उपलब्ध कराने तथा उनके संपूर्ण डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने की कड़ी मांग की गई है। नोटिस में यह भी साफ किया गया है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर कंपनी द्वारा कोई संतोषजनक विधिक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उपलब्ध कानूनी मंचों और न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होंगे।
अंत में सुशील भट्ट ने डिजिटल अधिकारों पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जनसंपर्क, जनहित के मुद्दों को उठाने और सार्वजनिक संवाद का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में बिना किसी पर्याप्त और न्यायसंगत कारण के किसी भी नागरिक की डिजिटल उपस्थिति को अचानक समाप्त कर देना एक अत्यंत गंभीर और विचारणीय विषय है, जिसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और समीक्षा होनी बेहद जरूरी है।





