Nainital_Alert: निजी स्कूलों की मनमानी पर नैनीताल DM का महा-ऐक्शन! 1 जुलाई से वापस करनी होगी अतिरिक्त वसूली गई फीस, उल्लंघन पर लगेगा ₹5 लाख का विधिक जुर्माना!
नैनीताल:
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद से शिक्षा व्यवस्था और अभिभावकों के विधिक अधिकारों को लेकर इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। जनपद के निजी (प्राइवेट) स्कूलों द्वारा विभिन्न अवैध मदों में अनाधिकृत शुल्क वसूलने और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने की गंभीर शिकायतों पर जिलाधिकारी (DM) ललित मोहन रयाल ने बेहद कड़ा विधिक रुख अपनाया है। जिलाधिकारी के सीधे अनुमोदन के उपरान्त मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) गोविन्द राम जायसवाल द्वारा नैनीताल जिले के सभी निजी स्कूलों के लिए शुल्क निर्धारण एवं वसूली सम्बन्धी विस्तृत विधिक गाइडलाइंस और सख्त आदेश जारी कर दिए गए हैं। शासन-प्रशासन की इस बड़ी कार्रवाई से जिले के हजारों अभिभावकों को बहुत बड़ी वित्तीय राहत मिलने जा रही है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने विधिक जांच का हवाला देते हुए बताया कि कई प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस (शिक्षण शुल्क) के अतिरिक्त एडमिशन फीस, डेवलपमेंट चार्ज, परीक्षा शुल्क तथा अन्य काल्पनिक मदों में मनमाने ढंग से अवैध वसूली कर रहे थे। नए विधिक आदेश के अनुसार, अब कोई भी स्कूल अत्यधिक प्रवेश शुल्क नहीं वसूल सकेगा, यह केवल वास्तविक और औचित्यपूर्ण व्यय के आधार पर ही लिया जा सकेगा।
नए विधिक आदेश के मुख्य बिंदु और शुल्क संरचना (Fee Structure 2026-27):
प्रशासन द्वारा जारी की गई नई नियमावली के तहत स्कूलों की मनमानी पर पूरी तरह से विधिक शिकंजा कस दिया गया है, जिसके मुख्य नियम निम्नवत हैं:
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फीस वृद्धि पर कैपिंग: राज्य सरकार द्वारा बोर्ड संबद्धता (NOC) की शर्तों के अनुसार, कोई भी निजी विद्यालय 3 वर्षों की अवधि में कुल अधिकतम 10% से ज्यादा फीस वृद्धि नहीं कर सकेगा। इसके लिए भी अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) की लिखित विधिक स्वीकृति अनिवार्य होगी।
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परीक्षाओं की सीमा तय: स्कूलों को पूरे शैक्षिक सत्र में केवल 4 मासिक परीक्षाएं, 1 अर्धवार्षिक एवं 1 वार्षिक परीक्षा आयोजित करने की ही विधिक अनुमति होगी। बोर्ड कक्षाओं के लिए अधिकतम 1 या 2 प्री-बोर्ड परीक्षाएं ही ली जा सकेंगी।
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कैपिंग ऑन एग्जाम फीस: परीक्षा शुल्क का निर्धारण प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका की वास्तविक लागत पर होगा। किसी भी स्थिति में उच्चतम कक्षा के लिए परीक्षा शुल्क ₹600 से अधिक नहीं लिया जा सकेगा।
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टीटी फीस मात्र ₹1: स्कूलों में मनमाने ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) शुल्क पर विधिक रोक लगाते हुए इसे मात्र ₹1 निर्धारित कर दिया गया है।
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एकमुश्त फीस का दबाव खत्म: अभिभावकों की सुविधा के लिए स्कूलों को मासिक (Monthly), त्रैमासिक (Quarterly), छमाही या वार्षिक भुगतान का विधिक विकल्प देना होगा। किसी को भी एकमुश्त फीस के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा और हर भुगतान की पक्की रसीद अनिवार्य होगी।
1 जुलाई से शुरू होगा अतिरिक्त वसूली गई रकम का समायोजन (Refund Process)
इस विधिक आदेश का सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रावधान यह है कि शैक्षिक सत्र 2026-27 में स्कूलों द्वारा विभिन्न अवैध मदों में वसूली गई अतिरिक्त धनराशि को 01 जुलाई 2026 के शिक्षण शुल्क में अनिवार्य रूप से समायोजित (Refund/Adjust) किया जाएगा। यदि वसूली गई अतिरिक्त राशि जुलाई महीने की फीस से भी ज्यादा निकलती है, तो शेष बची हुई धनराशि को आगामी महीनों की फीस में काटा जाएगा। सभी निजी स्कूलों को इस विधिक समायोजन का एक प्रमाणित विवरण आदेश जारी होने के 7 दिनों के भीतर जिला शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
आदेश का उल्लंघन करने पर लगेगा ₹5.00 लाख तक का भारी आर्थिक दंड
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने साफ कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी विधिक स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने सभी प्रबंधकों को चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्कूल ने इन विधिक आदेशों का उल्लंघन किया, तो उनके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, जिसके तहत:
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आर.टी.ई. एक्ट (RTE Act) के तहत ₹1,00,000 (₹1 लाख) का आर्थिक दंड।
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सी.बी.एस.ई. बायलॉज (CBSE Bye-laws) के सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत ₹5,00,000 (₹5 लाख) का भारी जुर्माना।
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इसके अतिरिक्त स्कूल की विधिक मान्यता प्रत्याहरण (Recognition Withdrawal) और एन.ओ.सी. (NOC) निरस्तीकरण की विधिक संस्तुति शासन को भेज दी जाएगी।





