राज्य में जगह-जगह लंबित मांगों और मानदेय विसंगतियों को लेकर आशा कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, देहरादून में विशाल रैली निकाल शासन-प्रशासन को चेताया! 👩⚕️🔥👇
देहरादून: उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में अपनी लंबे समय से लंबित मांगों और मानदेय विसंगतियों को लेकर आशा कर्मचारियों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ‘अखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ’ ने ‘भारतीय मजदूर संघ’ (BMS) के बैनर तले देहरादून की सड़कों पर उतरकर एक दिवसीय विशाल रैली निकाली और जोरदार प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NRHM/NHM) के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली इन आशा कार्यकत्रियों और आशा फैसिलेटरों ने शासन-प्रशासन पर लगातार वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाया। प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी (DM) के माध्यम से देश के माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक विस्तृत मांग पत्र (ज्ञापन) प्रेषित कर जल्द से जल्द उचित विधिक कार्रवाई की मांग की है।
“सिर्फ आश्वासन मिले, मानदेय नहीं बढ़ा”— लंबे समय से आक्रोशित हैं कर्मचारी
रैली के दौरान कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी विभिन्न जायज मांगों के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग से गुहार लगा रही हैं। हर बार शासन और प्रशासन के उच्च अधिकारियों द्वारा उन्हें सिर्फ कोरा आश्वासन देकर शांत करा दिया जाता है, लेकिन धरातल पर उनके मानदेय और वेतन में अभी तक कोई सम्मानजनक बढ़ोतरी नहीं की गई है। अल्प मानदेय में चौबीसों घंटे स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली इन महिलाओं के सब्र का बांध अब टूट चुका है, जिसके चलते उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
आशा कर्मचारियों की 8 सूत्रीय ‘जटिल’ मांगें:
महासंघ ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में अपनी 8 सूत्रीय प्रमुख मांगों को प्रमुखता से रेखांकित किया है:
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राज्य कर्मचारी का दर्जा: सभी आशा कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से ‘राज्य कर्मचारी’ घोषित किया जाए।
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न्यूनतम वेतन की गारंटी: आशा कर्मचारियों को योग्यता व कार्य के आधार पर ₹18,000 से लेकर ₹36,000 तक का मासिक वेतन सुनिश्चित किया जाए।
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पदोन्नति (Promotion) व्यवस्था: योग्यता और वरिष्ठता के अनुसार आशा कार्यकत्रियों को फैसिलेटर के पद पर तथा फैसिलेटरों को ब्लॉक कोऑर्डिनेटर के पद पर पदोन्नत किया जाए।
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पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट: सेवाकाल पूरा होने या सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक रिटायरमेंट बेनिफिट और मासिक पेंशन योजना लागू की जाए।
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टीकाकरण भत्ते में बंपर वृद्धि: बच्चों व गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण कार्य के लिए मिलने वाले ₹100 के भत्ते को बढ़ाकर सीधे ₹1,000 प्रति सत्र किया जाए।
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विशेष प्रशिक्षण: अनुभवी आशा वर्कर्स को टीकाकरण के उन्नत और आधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था की जाए।
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सालाना वर्दी की व्यवस्था: साल में मौसम के अनुकूल सर्दी और गर्मी की अलग-अलग वर्दियां (Uniforms) सरकारी स्तर पर मुहैया कराई जाएं।
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₹5 लाख का दुर्घटना व मृत्यु मुआवजा: कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना, सामान्य मृत्यु या आकस्मिक मृत्यु होने की दशा में आश्रित परिवार को ₹5,00000 (पांच लाख रुपये) का विधिक मुआवजा/भुगतान दिया जाए।
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रैली में ये प्रमुख पदाधिकारी और मातृशक्ति रही मौजूद
इस एक दिवसीय विशाल प्रदर्शन और रैली को सफल बनाने में अखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेनू नेगी, प्रदेश महामंत्री ललतेश विश्वकर्मा, जिला अध्यक्ष लक्ष्मी शर्मा, कार्यकारिणी अध्यक्ष कुसुम चौहान, कोषाध्यक्ष अमिता चौहान, जिला मंत्री संगीता रानी ने मुख्य भूमिका निभाई।
इसके साथ ही भारतीय मजदूर संघ से अर्चना बिष्ट और अवनीश कांत ने भी रैली का विधिक व नैतिक समर्थन किया। प्रदर्शन में मुख्य रूप से लक्ष्मी कुकरेती, आनंदी गोदियाल, अनिता पवार, अनिता भट्ट, अरिंदर कौर, गंगा गुप्ता, सरस्वती रावत, आशा सेमवाल, सविता मनवाल सहित सैकड़ों की संख्या में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आईं आशा कार्यकत्रियां और फैसिलेटर उपस्थित रहीं।
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