बदरीनाथ धाम महाघोटाला: दान-चढ़ावे की हेराफेरी में CCTV फुटेज ने खोले राज 👇
अब ‘वीआईपी दर्शन’ वसूली भी जांच के दायरे में!
गोपेश्वर/चमोली: विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में भगवान के चरणों में आने वाले दान-चढ़ावे की कथित हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब बेहद गरमा गया है। बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) की विशेष जांच टीम ने इस महाघोटाले की परतें खोलने के लिए बुधवार को मंदिर परिसर में डेरा डाल दिया। जांच टीम ने मंदिर के भीतर लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, दान गणना (Donation Counting) से जुड़े तमाम रिकॉर्ड, बही-खातों और अन्य विधिक दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर उनकी बारीकी से स्क्रूटनी की है। इस दौरान दान गणना प्रक्रिया में शामिल रहे कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों से भी बंद कमरे में कड़ी पूछताछ की गई। विभागीय और पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस मामले में रोज़ नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
CCTV फुटेज में कैद हुए संदिग्ध दृश्य, सस्पेंडेड कर्मचारी की बढ़ी मुश्किलें
जांच से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर की सीसीटीवी फुटेज खंगालने के दौरान जांच टीम के हाथ कुछ ऐसे संदिग्ध विजुअल्स (दृश्य) लगे हैं, जो सीधे तौर पर वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहे हैं। इन फुटेज के आधार पर ही पुलिस और विभागीय स्तर पर दर्ज मामलों की जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
आपको बता दें कि इस पूरे प्रकरण में मुख्य आरोपी और मंदिर समिति के निलंबित (Suspended) कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ पहले ही पुलिस में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। फिलहाल पुलिस और बीकेटीसी की विजिलेंस विंग अलग-अलग स्तर पर साक्ष्य जुटाने में लगी है, जिससे आरोपी कर्मचारी की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।
“उस दिन हमें गिनती के लिए बुलाया ही नहीं गया”— कर्मचारियों का बड़ा खुलासा
जांच टीम ने उन कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए तलब किया जो सामान्य दिनों में रूटीन के तौर पर मंदिर के दान-चढ़ावे और नोटों की गिनती (Cash Counting) की प्रक्रिया का हिस्सा रहते हैं। पूछताछ के दौरान कई कर्मचारियों ने जांच अधिकारियों के सामने एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है।
कर्मचारियों ने बताया कि जिस दिन कथित तौर पर हेराफेरी की यह घटना हुई, उस विशेष दिन उन्हें जानबूझकर नोटों की गिनती के लिए नहीं बुलाया गया था। इस खुलासे के बाद जांच टीम का शक गहरा गया है कि इस खेल के पीछे कोई सोची-समझी साजिश हो सकती है। अब टीम उस दिन काउंटर पर मौजूद अन्य लोगों और गवाहों के बयानों का मिलान कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी और स्पष्ट क्रोनोलॉजी सामने आ सके।
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नया मोड़: अब ‘वीआईपी दर्शन शुल्क’ भी आया जांच की रडार पर
बदरीनाथ धाम के इस विवाद ने उस समय एक बिल्कुल नया मोड़ ले लिया, जब मंदिर में वीआईपी दर्शन (VIP Darshan) के नाम पर श्रद्धालुओं से वसूले जाने वाले भारी-भरकम शुल्क का मुद्दा भी इस जांच के दायरे में शामिल कर लिया गया। जानकारी के अनुसार, अब इस बात की गहन विधिक जांच की जा रही है कि वीआईपी दर्शन के नाम पर जो रसीदें काटी गईं और जो शुल्क लिया गया, क्या वह मंदिर समिति द्वारा निर्धारित नियमों, शासनादेशों और बोर्ड की आधिकारिक स्वीकृति के अनुरूप था या नहीं। मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वीआईपी रसीद बुक, डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों की री-समीक्षा की जा रही है।
धाम पहुंचेगी शासन की उच्चस्तरीय जांच समिति, निष्पक्ष कार्रवाई का दावा
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड शासन द्वारा गठित उच्चस्तरीय जांच समिति (High-Level Investigation Committee) भी पूरे घटनाक्रम की चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है। शासन की यह विशेष समिति जल्द ही बदरीनाथ धाम पहुंचकर जमीनी स्तर पर स्थलीय निरीक्षण (Spot Inspection) करेगी और आरोपी सहित संबंधित बड़े अधिकारियों के बयान दर्ज करेगी।
इधर, बीकेटीसी प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यह जांच पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और जीरो-टॉलरेंस की नीति के तहत की जा रही है। यदि जांच के अंतिम निष्कर्ष में किसी भी स्तर पर मंदिर की पवित्रता और नियमों के उल्लंघन या वित्तीय भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो संबंधित रसूखदारों के खिलाफ बिना किसी रियायत के तत्काल कठोर कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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