देवभूमि जन हुंकार, देहरादून/पिथौरागढ़ (04 अगस्त 2026): दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान खाकी वर्दी पहनकर मंच से भाषण देने और सार्वजनिक रूप से अपना पुलिस बैज उतारकर इस्तीफा पत्र लहराने वाले उत्तराखंड पुलिस के विवादित निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह को विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक (SP) अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्काल प्रभाव से सिपाही की सेवा समाप्ति के आदेश जारी कर दिए हैं।
पुलिस अधिनियम व कर्मचारी आचरण नियमावली का पाया गया दोषी
पुलिस विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, विभागीय जांच में कांस्टेबल शेर सिंह को उत्तराखंड पुलिस अधिनियम-2007 और उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली-2002 के गंभीर उल्लंघन का दोषी पाया गया है।
पिथौरागढ़ पुलिस के मुताबिक, शेर सिंह गत 28 जून 2026 से बिना किसी पूर्व अनुमति या सूचना के अपनी आधिकारिक ड्यूटी से लगातार अनुपस्थित चल रहा था। विभाग द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बावजूद संतोषजनक जवाब न देने पर उसे 20 जुलाई 2026 को निलंबित किया गया था।
जंतर-मंतर पर वर्दी पहनकर दिया था भड़काऊ भाषण
निलंबन की अवधि के दौरान ही शेर सिंह ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित Gen-Z प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर मंच से भाषण दिया था। इस दौरान उसने खुद को ‘बागी’ बताते हुए मंच पर अभिजीत दिपके के समर्थन में बातें कही थीं और अपना पुलिस बैज उतारकर नौकरी से इस्तीफा देने का दावा करते हुए पत्र लहराया था।
विभाग ने स्पष्ट किया कि एक्टिव पुलिस सेवा में रहते हुए या निलंबन के दौरान वर्दी का अनुचित प्रयोग कर राजनीतिक व उग्र आंदोलनों में भाषण देना सेवा नियमों के पूर्णतः विपरीत और घोर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
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गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि से साठगांठ, रंगदारी और जमीन कब्जे का आरोपी
पुलिस ने पूर्व सिपाही शेर सिंह के काले कारनामों और आपराधिक इतिहास का भी खुलासा किया है। आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती और एसटीएफ (STF) की जांच रिपोर्ट के अनुसार, शेर सिंह का नाम हरिद्वार के गंगनहर थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 415/2025 में नामजद है। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत है।
जांच में यह तथ्य प्रमाणित हुए थे कि हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र के कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के आपराधिक गिरोह में शेर सिंह की सक्रिय भूमिका थी। वह अन्य सह-आरोपियों (मनीष बॉलर, हसन अब्बास जैदी आदि) के साथ मिलकर आम नागरिकों को डरा-धमकाकर उनकी बेशकीमती जमीनों पर अवैध कब्जा करता था और उससे अवैध आर्थिक लाभ कमाता था। इसी मामले में वर्ष 2025 में एसटीएफ द्वारा उसे गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा चुका है।
“अनुशासन और सत्यनिष्ठा से कोई समझौता नहीं”—उत्तराखंड पुलिस
पिथौरागढ़ पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने बर्खास्तगी का आदेश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि शेर सिंह अब उत्तराखंड पुलिस का कर्मचारी नहीं है और भविष्य में उसकी किसी भी व्यक्तिगत या आपराधिक गतिविधि के लिए उत्तराखंड पुलिस का कोई उत्तरदायित्व नहीं होगा।
उत्तराखंड पुलिस प्रशासन ने कड़ा संदेश दिया है कि खाकी की गरिमा, अनुशासन, सत्यनिष्ठा और सेवा आचरण से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों पर आगे भी ऐसी ही कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
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