देवभूमि जन हुंकार, अल्मोड़ा (05 अगस्त 2026): उत्तराखंड के पर्वतीय सीमांत जिलों में बेहतर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के तमाम दावों की दर्दनाक हकीकत एक बार फिर सामने आई है। अल्मोड़ा जनपद अंतर्गत सल्ट-भतरौजखान क्षेत्र में सोमवार देर रात समय पर प्राथमिक उपचार न मिलने और अस्पतालों के बीच रेफर-रेफर का खेल चलने से 42 वर्षीय पूर्व ग्राम प्रधान गणेश गिरी की जान चली गई। घटना के बाद से ग्रामीणों और परिजनों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी गुस्सा व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अल्मोड़ा ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
रात 11 बजे बंद मिला भतरौजखान अस्पताल, ताला लटका देख उड़े परिजनों के होश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भौनली निवासी एवं पूर्व ग्राम प्रधान गणेश गिरी सोमवार की रात अपने घर के पास अचानक दीवार से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनके सिर में गहरी चोट आई थी। गंभीर हालत को देखते हुए रात करीब 11 बजे उनके भाई प्रदीप गोस्वामी, चाचा वीरेंद्र गोस्वामी, भतीजा शिवेंद्र गिरी और पूरन गोस्वामी उन्हें तत्काल उपचार हेतु भतरौजखान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) लेकर पहुँचे।
परिजनों का आरोप है कि जब वे अस्पताल पहुँचे तो मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ था और भीतर कोई भी चिकित्साकर्मी मौजूद नहीं था। परिजनों ने अस्पताल के बोर्ड पर लिखे आपातकालीन नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन नंबर बंद आया।
इलाज शुरू करने के बजाय पुलिस बुलाने का आरोप, रानीखेत व अल्मोड़ा रेफर
परिजनों द्वारा काफी देर तक शोर मचाने के बाद अस्पताल का एक कर्मचारी मौके पर पहुँचा। इसके कुछ समय पश्चात चिकित्साधिकारी डॉ. करन भी अस्पताल पहुँचे। परिजनों का बेहद संगीन आरोप है कि घायल गणेश गिरी का तुरंत उपचार शुरू करने के बजाय डॉक्टर ने पहले पुलिस को फोन करके मौके पर बुला लिया, जिससे इलाज का बेहद कीमती समय बर्बाद हो गया।
काफी देर बाद भतरौजखान PHC के डॉक्टर ने घायल का प्राथमिक उपचार कर उन्हें करीब 40 किलोमीटर दूर उप जिला चिकित्सालय रानीखेत रेफर कर दिया। रानीखेत पहुँचने पर वहाँ मौजूद डॉक्टरों ने भी मरीज की स्थिति नाजुक देखते हुए उन्हें रात में ही बेस अस्पताल अल्मोड़ा के लिए रेफर कर दिया। एम्बुलेंस से अस्पतालों के चक्कर काटते-काटते सुबह करीब साढ़े पांच बजे जब परिजन उन्हें बेस अस्पताल अल्मोड़ा लेकर पहुँचे, तो वहाँ डॉक्टरों ने परीक्षण के उपरांत गणेश गिरी को मृत घोषित कर दिया।
ग्रामीणों ने घेरी कार्यप्रणाली, कहा—”रेफर के बजाय इलाज मिला होता तो बच जाती जान”
भौनली ग्राम पंचायत के वर्तमान प्रधान जगत राम, स्थानीय ग्रामीण जगदीश पांडे और अशोक सती ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में न तो डॉक्टर समय पर उपलब्ध मिल रहे हैं और न ही आपातकालीन सेवाएँ काम आ रही हैं। यदि भतरौजखान या रानीखेत अस्पतालों में से किसी एक जगह भी समय पर समुचित प्राथमिक उपचार (First Aid) मिल गया होता, तो गणेश गिरी आज जीवित होते।
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अधिकारियों के आधिकारिक बयान:
“अस्पतालों से मरीज को लगातार रेफर किया जाना और प्राथमिक उपचार में देरी होना एक बेहद गंभीर मामला है। इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। इसके लिए मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।”
— अंशुल सिंह, जिलाधिकारी (DM), अल्मोड़ा
“भतरौजखान अस्पताल में उस समय चिकित्साधिकारी मौजूद थे। मरीज को जो भी नियमानुसार उचित इलाज मिलना चाहिए था, वह दिया गया था। मरीज की स्थिति अधिक गंभीर होने के कारण ही उसे आगे रेफर किया गया था।”
— डॉ. एचसी पंत, मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO), अल्मोड़ा
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