देवभूमि जन हुंकार, देहरादून : उत्तराखंड में अपने अधिकारों और न्याय के लिए सालों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे उपनल कर्मचारियों के लिए प्रदेश की राजधानी देहरादून से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। साल 2018 के हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद जहाँ प्रदेश के कई विभागों में मामला अटका पड़ा था, वहीं प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों ने पहल करते हुए उपनल कर्मचारियों के लिए ‘समान काम का समान वेतन’ (Equal Pay for Equal Work) व्यवस्था लागू करने का बड़ा फैसला लिया है।
ऊर्जा निगमों ने जारी किए आधिकारिक आदेश
उत्तराखंड के तीनों ऊर्जा निगमों ने न केवल इस व्यवस्था को स्वीकार किया है, बल्कि इसके क्रियान्वयन हेतु आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए हैं। इस फैसले के बाद से उपनल कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में हाईकोर्ट द्वारा उपनल कर्मचारियों के पक्ष में दिए गए आदेश के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट तक गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार की याचिका खारिज हो चुकी थी। इसके बावजूद कई विभागों में कोर्ट के आदेश का पालन न होने पर अवमानना (Contempt) की याचिकाएं भी लंबित हैं। ऐसे समय में ऊर्जा निगमों द्वारा लिया गया यह निर्णय बेहद अहम माना जा रहा है।
2612 उपनल कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
ऊर्जा निगमों में समान काम के बदले समान वेतन का लाभ पाने वाले उपनल कर्मचारियों की कुल संख्या करीब 2612 है। निगमवार आँकड़े निम्नलिखित हैं:
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उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL): सबसे ज्यादा करीब 2000 उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं, जिन्हें इस फैसले का मुख्य लाभ मिलेगा।
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उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL): लगभग 500 उपनल कर्मचारियों को समान वेतन की परिधि में लाया गया है।
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पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL): करीब 112 उपनल कर्मियों को इस आदेश का सीधा फायदा होगा।
“बाकी विभाग भी लें ऊर्जा निगम से सीख”—उपनल कर्मचारी
ऊर्जा निगमों द्वारा आदेश जारी किए जाने के बाद उपनल कर्मचारियों ने अन्य सरकारी विभागों को भी आड़े हाथों लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला होने के बावजूद प्रदेश के कई विभागों में अधिकारी टालमटोल रवैया अपना रहे हैं। बाकी सरकारी विभागों को भी ऊर्जा निगमों से सीख लेते हुए अपने कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देना चाहिए।
समान काम का समान वेतन लागू होने के बाद अब उपनल कर्मचारियों की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बड़े वित्तीय अधिकार के मिलने के बाद अब सरकार उनके लंबे समय से लंबित नियमितीकरण (Regularization) के मुद्दे पर भी जल्द कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय लेगी।
देवभूमि जन हुंकार, देहरादून (07 अगस्त 2026): उत्तराखंड में अपने अधिकारों और न्याय के लिए सालों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे उपनल कर्मचारियों के लिए प्रदेश की राजधानी देहरादून से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। साल 2018 के हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद जहाँ प्रदेश के कई विभागों में मामला अटका पड़ा था, वहीं प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों ने पहल करते हुए उपनल कर्मचारियों के लिए ‘समान काम का समान वेतन’ (Equal Pay for Equal Work) व्यवस्था लागू करने का बड़ा फैसला लिया है।
ऊर्जा निगमों ने जारी किए आधिकारिक आदेश
उत्तराखंड के तीनों ऊर्जा निगमों ने न केवल इस व्यवस्था को स्वीकार किया है, बल्कि इसके क्रियान्वयन हेतु आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए हैं। इस फैसले के बाद से उपनल कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में हाईकोर्ट द्वारा उपनल कर्मचारियों के पक्ष में दिए गए आदेश के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट तक गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार की याचिका खारिज हो चुकी थी। इसके बावजूद कई विभागों में कोर्ट के आदेश का पालन न होने पर अवमानना (Contempt) की याचिकाएं भी लंबित हैं। ऐसे समय में ऊर्जा निगमों द्वारा लिया गया यह निर्णय बेहद अहम माना जा रहा है।
2612 उपनल कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
ऊर्जा निगमों में समान काम के बदले समान वेतन का लाभ पाने वाले उपनल कर्मचारियों की कुल संख्या करीब 2612 है। निगमवार आँकड़े निम्नलिखित हैं:
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उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL): सबसे ज्यादा करीब 2000 उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं, जिन्हें इस फैसले का मुख्य लाभ मिलेगा।
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उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL): लगभग 500 उपनल कर्मचारियों को समान वेतन की परिधि में लाया गया है।
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पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL): करीब 112 उपनल कर्मियों को इस आदेश का सीधा फायदा होगा।
“बाकी विभाग भी लें ऊर्जा निगम से सीख”—उपनल कर्मचारी
ऊर्जा निगमों द्वारा आदेश जारी किए जाने के बाद उपनल कर्मचारियों ने अन्य सरकारी विभागों को भी आड़े हाथों लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला होने के बावजूद प्रदेश के कई विभागों में अधिकारी टालमटोल रवैया अपना रहे हैं। बाकी सरकारी विभागों को भी ऊर्जा निगमों से सीख लेते हुए अपने कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देना चाहिए।
समान काम का समान वेतन लागू होने के बाद अब उपनल कर्मचारियों की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बड़े वित्तीय अधिकार के मिलने के बाद अब सरकार उनके लंबे समय से लंबित नियमितीकरण (Regularization) के मुद्दे पर भी जल्द कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय लेगी।
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