देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी (08 अगस्त 2026): हल्द्वानी के रानीबाग स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण चित्रेश्वर धाम परिसर में नए शनि मंदिर के निर्माण को लेकर एक बड़ा राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। पहाड़ी (कत्युरी) समाज ने इस मंदिर को अवैध अतिक्रमण बताते हुए इसे तत्काल ध्वस्त करने अथवा अन्यत्र विस्थापित करने की पुरजोर मांग उठाई है, जिसके लिए समाज ने स्थानीय प्रशासन को कड़ा अल्टिमेटम जारी किया है।
जिया कत्युरी की पवित्र तपस्थली पर अवैध निर्माण का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहाड़ी (कत्युरी) समाज के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार हल्द्वानी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखंड को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि चित्रेश्वर रानीबाग क्षेत्र राजमाता जिया कत्युरी की पवित्र तपस्थली और कर्मभूमि रही है। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, इस क्षेत्र का विशेष महत्व है और चित्रेश्वर-पदमेश्वर महादेव मंदिर की ऐतिहासिक मान्यता अत्यंत प्राचीन और गहरी है।
पहाड़ी समाज ने प्रशासनिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए कि चित्रेश्वर-पदमेश्वर महादेव के नाम दर्ज भूमि पर बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के एक शनि मंदिर का अवैध निर्माण किया गया है। कत्युरी समाज ने मुख्यमंत्री से इस अवैध निर्माण से जुड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के आहत होने का हवाला देते हुए मंदिर परिसर को पूर्णतः अतिक्रमण मुक्त कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की कड़ी मांग की है।
तीर्थ नगरी व समग्र विकास की मांग
इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में चित्रेश्वर रानीबाग क्षेत्र को ‘मानसखंड माला समूह परियोजना’ में शामिल कर इसका समग्र विकास करने और सरकारी दस्तावेजों में इसे विधिवत तीर्थ नगरी घोषित करने की भी मांग की गई है। पहाड़ी कत्युरी समाज ने इस मुद्दे को लेकर प्रशासन को 10 दिन का समय देते हुए कार्रवाई न होने पर बड़े जनआंदोलन की कड़ी चेतावनी दी है।
10 दिन का अल्टिमेटम और आंदोलन की चेतावनी
पहाड़ी (कत्युरी) समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित 10 दिनों की अवधि में अवैध शनि मंदिर को लेकर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो समाज चक्का जाम, क्रमिक अनशन और आमरण अनशन जैसे उग्र कदम उठाने को मजबूर होगा। इस चेतावनी ने हल्द्वानी में धार्मिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में यह विवाद गंभीर रूप ले सकता है।
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