
विश्व मानवतावादी दिवस पर जीआईसी रातीघाट में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित। एसडीआरएफ ने सिखाया सीपीआर, पुलिस ने 1930 हेल्पलाइन और एनडीपीएस एक्ट की दी जानकारी।

देवभूमि जन हुंकार, रातीघाट (नैनीताल): माननीय उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) / जिला न्यायाधीश नैनीताल श्री प्रशांत जोशी के कुशल मार्गदर्शन में राजकीय इंटर कॉलेज रातीघाट में विश्व मानवतावादी दिवस के उपलक्ष्य में एक दिवसीय बहुउद्देश्यीय विधिक साक्षरता, एसडीआरएफ प्रशिक्षण एवं चिकित्सा परीक्षण शिविर का भव्य आयोजन किया गया। शिविर का नेतृत्व सिविल जज (सीनियर डिवीजन) / सचिव डीएलएसए नैनीताल श्रीमती पारुल थपलियाल द्वारा किया गया।
शिविर के प्रारंभ में राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीम द्वारा छात्र-छात्राओं और उपस्थित ग्रामीणों को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के समय किए जाने वाले त्वरित प्राथमिक उपचार और बचाव कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया।
एसडीआरएफ प्रशिक्षकों ने बताया कि बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, आगजनी, सड़क-रेल दुर्घटनाओं और बोरवेल जैसी आपात स्थितियों में किस प्रकार त्वरित बचाव अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित निकाला जाता है। इसके साथ ही आपातकालीन जीवनरक्षक प्रक्रिया सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन दिया गया। प्रशिक्षकों ने समझाया कि यदि किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन अचानक रुक जाए, तो सीपीआर देकर मस्तिष्क और अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह बनाए रखा जा सकता है, जिससे एंबुलेंस या डॉक्टर के आने तक व्यक्ति का जीवन बचाया जा सके।
पुलिस विभाग से आए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के प्रभारी रमेश पन्त ने नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों और एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के कड़े कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से व्याख्यान दिया।
वहीं, पुलिस साइबर सेल प्रभारी मीनू गौतम ने वर्तमान डिजिटल युग में होने वाले ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग और यूपीआई फ्रॉड से बचने के सुरक्षा उपाय बताए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ कोई साइबर अपराध घटित होता है, तो वह बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
डीएलएसए सचिव श्रीमती पारुल थपलियाल ने विश्व मानवतावादी दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन उन साहसी लोगों के त्याग और बलिदान को समर्पित है जिन्होंने वैश्विक आपदाओं और संकटों में दूसरों का जीवन बचाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं और नागरिकों को मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निर्धारित गति सीमा, हेलमेट, सीट बेल्ट और यातायात संकेतों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने आगाह किया कि रैश ड्राइविंग, ड्रिंक एंड ड्राइव (शराब पीकर वाहन चलाना) और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर कानूनन भारी जुर्माना और कठोर सजा का प्रावधान है।
शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपस्थित सभी विद्यार्थियों और ग्रामीणों का नि:शुल्क सामान्य चिकित्सा परीक्षण कर आवश्यक परामर्श दिया गया।
इस अवसर पर जीआईसी रातीघाट के प्रधानाचार्य एस.पी. सिंह, यशवंत कुमार, संजय कुमार, पुष्कर बीना, उपनिरीक्षक विपुल भट्ट, गणेश भट्ट, विजय खैरोला, विक्रम सिंह, नवीन पांडे सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ, पुलिस बल एवं भारी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।
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