देवभूमि जन हुंकार, लालकुआं / नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के अंतर्गत लालकुआं के अंबेडकर सभागार में अखिल भारतीय किसान महासभा का चौथा नैनीताल जिला सम्मेलन पूरी भव्यता और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में जिलेभर से आए किसानों, खेत मजदूरों और प्रतिनिधियों ने भारी संख्या में शिरकत की। सम्मेलन के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों पर तीखा प्रहार किया गया, तथा सर्वसम्मति से नई जिला कार्यकारिणी का चुनाव करने के साथ ही कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए।
सम्मेलन की शुरुआत सांगठनिक रिपोर्ट और चर्चा के साथ हुई, जिसके बाद 31 सदस्यीय परिषद का चुनाव किया गया। इस परिषद ने 17 सदस्यीय कार्यकारिणी का चयन किया। इसके पश्चात पदाधिकारियों का सर्वसम्मति से चुनाव संपन्न हुआ, जिसके परिणाम इस प्रकार हैं:
जिलाध्यक्ष: आनंद सिंह सिजवाली,जिला सचिव: नैन सिंह कोरंगा,उपाध्यक्ष: बची सिंह कपकोटी एवं प्रेम सिंह नयाल,उप सचिव: वेद प्रकाश,कोषाध्यक्ष: निर्मला शाही,प्रचार सचिव: दीवान सिंह बर्गली,संगठन सचिव: अमित कोहली एवं बशीर अहमद,अन्य कार्यकारिणी सदस्य: भुवन जोशी, चंदन राम, विमला पाल, किशन बघरी, पुष्कर दुबड़िया, कमल जोशी और पंकज चौहान। इसके अलावा सम्मेलन में भुवन जोशी, आनंद सिंह नेगी, डॉ. कैलाश पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ नेता व पर्यवेक्षक के रूप में सी.पी. अधिकारी, धर्मपाल व विष्णु देव उपस्थित रहे। संचालन किशन बघरी ने किया।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी कहा कि, आज हम ऐसे समय में इकट्ठा हुए हैं जब देश की खेती और किसान दोनों गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। मोदी सरकार लगातार दावा करती है कि उसने किसानों के हित में ऐतिहासिक काम किए हैं। लेकिन हमें सरकार के दावों से नहीं, किसान की वास्तविक जिंदगी से कृषि नीति को परखना होगा।किसान से पूछिए—क्या उसकी खेती की लागत घटी है? क्या उसे अपनी फसल का लाभकारी दाम मिल रहा है? क्या उसे एमएसपी की कानूनी गारंटी मिली? क्या डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक और कृषि उपकरण सस्ते हुए? क्या किसानों का कर्ज खत्म हुआ? क्या आवारा पशु, सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि और जलवायु संकट से उसे पर्याप्त सुरक्षा मिली? अगर इन सवालों का जवाब ‘नहीं’ है, तो फिर हमें कहना पड़ेगा कि मोदी सरकार की कृषि नीति किसान-केंद्रित नहीं किसान विरोधी है।
उन्होंने कहा कि, आज का सवाल केवल इतना नहीं है कि सरकार किसानों के लिए क्या कर रही है बल्कि आज बड़ा सवाल यह है कि सरकार खेती की पूरी व्यवस्था किसके हाथों में सौंप रही है? किसान के हाथ में? या बड़े कॉरपोरेट के हाथ में?
उन्होंने जोर देकर कहा कि, भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार समझौते को कर मोदी सरकार ने भारत के किसान, खेत मजदूर, उपभोक्ता और खाद्य सुरक्षा पर हमला बोल दिया है. इसके साथ ही प्रस्तावित बीज विधेयक के माध्यम से मोदी सरकार बीज पर बड़े पूंजीपतियों का कॉरपोरेट नियंत्रण स्थापित करना चाहती है. कुल मिलाकर मोदी सरकार की कृषि नीति किसान विरोधी है इसलिये इसका पुरजोर विरोध जरूरी है.
अध्यक्षता करते हुए निवर्तमान जिलाध्यक्ष भुवन जोशी ने कहा कि, वन भूमि पर बसी आबादी के साथ भाजपा सरकार लगातार छल कर रही है. यदि राज्य सरकार में जनता के प्रति जरा सी भी सम्वेदनशीलता है तो उसे बिन्दुखत्ता, बागजाला, सुल्ताननगरी समेत वन भूमि पर बसे हुए सभी गांवों को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निर्वनीकरण का प्रस्ताव पारित कर केंद्र से स्वीकृति लेकर मालिकाना हक और राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, अन्यथा यही समझा जायेगा कि सरकार एक बार फिर से यहां की जनता को झुनझुना पकड़ाना चाहती है।
नव निर्वाचित जिलाध्यक्ष आनंद सिंह सिजवाली ने कहा कि, अखिल भारतीय किसान महासभा सरकार की अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ने की नीति के खिलाफ तथा दशकों से वन भूमि में रहने वालों को मालिकाना हक दिलाने के लिए अपने साथ अन्य जनसंगठनों, किसान संगठनों को साथ लेकर मोर्चा निर्माण करेगी तथा शीघ्र ही भूमि अधिकार सम्मेलन करते हुए राज्य में वन या सरकारी भूमि में रहने वालों के मालिकाना हक के साथ पंचायत चुनावों में भागीदारी करने, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा की समुचित व्यवस्था करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन जनांदोलन शुरू किया जायेगा ।
भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, मोदी-धामी की डबल इंजन भाजपा सरकार ने अपनी जनविरोधी नीतियों के माध्यम से मेहनतकश किसान मजदूर आबादी का जीना मुहाल कर दिया है. भाजपा – भूमि का मालिकाना, आवास, शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक, महँगाई, भ्रष्टाचार- जरूरी मुद्दों से लोगों का ध्यान बांटने के लिए विभाजन और नफरत की राजनीति का खतरनाक कार्ड खेल रही है. इस विभाजनकारी राजनीति को ध्वस्त किया जाना जरूरी है और इसके खिलाफ जनता की दृढ़ एकता के बल पर बड़ा जनान्दोलन खड़ा करना ही एकमात्र विकल्प है.
जिला सम्मेलन से पारित प्रस्ताव :
1. बिन्दुखत्ता, बागजाला, सुल्ताननगरी समेत वन भूमि पर बसे हुए सभी गांवों को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निर्वनीकरण का प्रस्ताव पारित कर केंद्र से स्वीकृति लेकर मालिकाना हक और राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाय।
2. बिंदुखत्ता, बागजाला, सुल्ताननगरी की टूटी और पुरानी जीर्ण-शीर्ण सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण तथा जिनके घरों तक पक्के रास्ते नहीं हैं उन्हें सीसी मार्ग द्वारा सड़क से जोड़ने का कार्य शुरू किया जाए।
3. अखिल भारतीय किसान महासभा दशकों से अपने जीवन की कमाई लगाकर वन भूमि या सरकारी जमीनों में रहने वालों को सरकार द्वारा अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ने की जन विरोधी नीति का पुरजोर विरोध करती है / करती रहेगी ।
4. भाजपा सरकार द्वारा लाये गये गोवंश संरक्षण अधिनियम 2007 से किसानों – पशुपालकों की पुश्तैनी आजीविका का साधन गोवंश को सरकारी आवारा गोवंश बनाये जाने से पशुपालकों – किसानों की फसलों की बर्बादी के साथ आर्थिक नुकसान तथा रास्तों-सड़कों पर गोवंश से राहगीरों – वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने से, हो रहे जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए, गोवंश संरक्षण अधिनियम 2007 में संशोधन कर गोवंश की स्थिति अनुसार यानि लैंणी, बाखड़ी, बैली, सांड, बैल, बछिया, बछड़े की कीमत निर्धारित कर सरकारी खरीद का प्रावधान सुनिश्चित किया जाय तथा सरकार द्वारा गोशालाओं को गोवंश की देखरेख, भरण-पोषण और गोशाला निर्माण के लिए दी जाने धनराशि सीधे पशुपालकों को आवंटित की जाय ताकि पशुपालक अलाभप्रद गोवंश को आवारा छोड़ने को बाध्य न हो । अन्यथा गोवंश संरक्षण अधिनियम को सरकार निरस्त करे ताकि पशुपालकों, किसानों व आम जनता के जीवन को सरकारी आवारा गोवंश से हो रहे नुकसान से निजात मिल सके।
5. बिंदुखत्ता में बिजली के पोल विधायक की संस्तुति पर अपने चहेतों के वहां लगाए जाने के बजाय जहां जहां जरूरत है विद्युत विभाग खुद पहल कर वहां पोल लगाना सुनिश्चित करें।
6. गौला नदी से हो रहे भू-कटाव के कारण बिन्दुखत्ता क्षेत्र में किसानों की कई एकड़ जमीन और कितने ही घर अब तक बह चुके हैं प्रतिवर्ष लगातार हो रहे भू-कटाव को स्थाई रूप से रोकने के लिए गौला के किनारे मजबूत तटबंध बनाते हुए फुल बट्टा से हल्द्वानी तीन पानी तक बायपास रोड बनाया जाए ।
7. बागजाला में वर्ष 2025 में अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में 100 दिनों तक चले अनिश्चितकालीन जनांदोलन के साथ उपजिलाधिकारी की मध्यस्थता में वन विभाग, जल संस्थान और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के बीच हुए समझौते में जल संस्थान से सड़क मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी के पास पहुंची धनराशि रू.13.31 लाख से टूटी सड़कों की मरम्मत कार्य शुरू करते हुए काम पूरा करने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी द्वारा ली गई थी परन्तु पीडब्ल्यूडी द्वारा आधा-अधूरा गड्ढे भरने का काम कर कार्य बन्द कर दिया गया गड्ढों के उपर डामरीकरण नहीं होने से सड़क की हालत जस की तस हो गई है किसान महासभा सम्मेलन के माध्यम से पीडब्ल्यूडी के इस गैर जिम्मेदाराना रवैए की भर्त्सना करते हुए जल्दी ही पीडब्ल्यूडी के खिलाफ बड़ा जनांदोलन शुरू करेगी ।
8. बागजाला, सुल्ताननगरी बागजाला सहित वन क्षेत्र में बसे गांवों को जो पूर्व में पंचायत चुनाव में सम्मिलित थे उन्हें फिर से सम्मिलित करते हुए वोटर लिस्ट में ग्रामीणों का नाम दर्ज कर पंचायत चुनाव में भागीदारी करने का नागरिक अधिकार दिया जाए ।
9. बागजाला और सुल्ताननगरी में जल जीवन मिशन द्वारा खोदी गई सड़कों व गांव के अन्दर अन्य टूटी सड़कों, रास्तों को शीघ्र गड्ढा मुक्त करने के लिए मरम्मत कार्य शुरू किया जाए ।
10. घोड़ानाला (बिंदुखत्ता) में बहने वाले नाले में मगरमच्छों के बढ़ते आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए मगरमच्छों को अन्यत्र क्रोकोडाइल पार्क पहुंचाया जाए और जनता के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले पेपर मिल द्वारा प्रदूषित नाले को भूमिगत पाइपों में डाला जाय।
11. जिले के सभी उद्योगों में स्थानीय बेरोजगारों को 70 प्रतिशत नियुक्ति दी जाय.
12. अखिल भारतीय किसान महासभा सरकार की अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ने की नीति के खिलाफ तथा दशकों से वन भूमि में रहने वालों को मालिकाना हक दिलाने के लिए अपने साथ अन्य जनसंगठनों, किसान संगठनों को साथ लेकर मोर्चा निर्माण करेगी तथा शीघ्र ही भूमि अधिकार सम्मेलन करते हुए राज्य में वन या सरकारी भूमि में रहने वालों के मालिकाना हक के साथ पंचायत चुनावों में भागीदारी करने, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा की समुचित व्यवस्था करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन जनांदोलन शुरू किया जायेगा ।
किसान महासभा के जिला सम्मेलन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि मौजूद रहे जिनमे मुख्य रूप से आनंद सिंह नेगी, भुवन जोशी, चंदन राम, आनंद सिंह सिजवाली, नैन सिंह कोरंगा, किशन बघरी, डॉ कैलाश पाण्डेय, वेद प्रकाश, बची सिंह कपकोटी, उर्मिला मौर्य, प्रेम सिंह नयाल, पुष्कर दुबड़िया, निर्मला शाही, विमला देवी, कमलापति जोशी, अमित कोहली, बशीर अहमद, हेमा आर्य, दीवान सिंह बर्गली, पंकज चौहान, मदन धामी, कमल जोशी, बाली राम, सरिता जंगी, ललित जोशी, राम सिंह खड़का, महेन्द्र आर्य, हरक सिंह बिष्ट, त्रिलोक सिंह दानू, सुरेश कुंवार, त्रिलोक शाह, आनंद दानू आदि शामिल रहे. सम्मेलन के पर्यवेक्षक के रूप में सी पी अधिकारी, धर्मपाल, विष्णु देव मौजूद रहे. संचालन किशन बघरी ने किया.




