Uttarakhand Political Concept Representing UPAP Government Land Protest In Almora
Spread the love

देवभूमि जन हुंकार, अल्मोड़ा / देहरादून: उत्तराखंड में निवेश और रोजगार के नाम पर सरकारी संपत्तियों और जमीनों को निजी हाथों में सौंपे जाने का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने प्रदेश में सरकारी भूमि की बिक्री, नीलामी और दीर्घकालीन लीज की सभी प्रक्रियाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग को लेकर जोरदार हुंकार भरी है। पार्टी ने उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) को तत्काल भंग करने तथा सरकारी भूमि आवंटन पर एक श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है।

यह भी पढ़ें 👉पत्नी के मायके जाने से तनाव में रहता था युवक”: कमरे के भीतर हुई इस खौफनाक घटना से इलाके में मचा हड़कंप, एसटीएच हल्द्वानी में चल रहा है इलाज

पी.सी. तिवारी के नेतृत्व में राज्यपाल और सीएम को भेजा गया ज्ञापन

इस संबंध में पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं संस्थापक अध्यक्ष पी.सी. तिवारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अल्मोड़ा में अपर जिलाधिकारी (ADM) के माध्यम से महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया।

ज्ञापन के माध्यम से पार्टी ने सरकार को चेताया है कि निवेश के नाम पर सरकारी विभागों की भूमि को निजी एवं व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया बेहद गंभीर चिंता का विषय है। उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, होटल, रिसॉर्ट, स्पा एवं वेलनेस सेंटर, आवासीय कॉलोनियों तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करीब 7,000 बीघा सरकारी भूमि से जुड़े प्रस्तावों पर तेजी से काम चल रहा है, जिस पर सरकार को स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करनी चाहिए।

यह भी पढ़ें 👉काठगोदाम से नैनीताल और कैंची धाम अब पहुंचे मिनटों में: 2800 करोड़ के भव्य रोपवे प्रोजेक्ट पर बड़ा अपडेट

सरकार श्वेतपत्र जारी करे और पारदर्शी समीक्षा हो — उपपा

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:

  1. श्वेतपत्र जारी हो: सरकार अब तक सरकारी भूमि के आवंटन, बिक्री, नीलामी और लीज से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक करे और एक श्वेतपत्र लाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि किस विभाग की कितनी भूमि, किस व्यक्ति या संस्था को, किस उद्देश्य से और किन शर्तों पर दी गई है।

  2. स्थानीय लोगों को प्राथमिकता: यदि निवेश के नाम पर भूमि उपलब्ध कराई जाती है, तो उसमें स्थानीय युवाओं, स्थानीय उद्यमियों, महिला समूहों, सहकारी संस्थाओं तथा छोटे और मध्यम कारोबारियों को प्राथमिकता देने की स्पष्ट नीति हो। किसी भी बड़े प्रोजेक्ट से पहले स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों की व्यापक जनहित में भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

  3. मूल भावना की रक्षा: नानीसार जैसे ऐतिहासिक संघर्षों का जिक्र करते हुए पार्टी ने कहा कि राज्य गठन की मूल भावना यही थी कि यहां के प्राकृतिक और भूमि संसाधनों का उपयोग स्थानीय लोगों के व्यापक हित में हो।

यह भी पढ़ें 👉काठगोदाम पुलिस और STF की संयुक्त कार्रवाई: 1.155 किलोग्राम अवैध चरस के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, स्कूटी जब्त

प्रदेशव्यापी जनआंदोलन की बड़ी चेतावनी

पार्टी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि उत्तराखंड को केवल निवेश के लिए उपलब्ध भूमि के रूप में नहीं देखा जा सकता। सरकार को ऐसी विकास नीति बनानी चाहिए जिसमें रोजगार के साथ-साथ स्थानीय समाज और आने वाली पीढ़ियों के हित सुरक्षित रहें।

उपपा ने दो-टूक कहा है कि यदि सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो पार्टी विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं जन संगठनों को साथ लेते हुए ‘नानीसार बचाओ, उत्तराखंड बचाओ’ की भावना को आगे बढ़ाते हुए एक बड़ा प्रदेशव्यापी जनआंदोलन शुरू करेगी।

ज्ञापन देने वालों में केंद्रीय उपाध्यक्ष नारायण राम, केंद्रीय सचिव किरण आर्य, एडवोकेट गोपाल राम, एडवोकेट मनोज पंत, वरिष्ठ नेता मोहम्मद साकिब, वंदना कोहली, हीरा देवी, पूजा आर्या, पार्वती थापा, त्रिभुवन शर्मा, रोहित बिष्ट, तौसीफ खान, सिमरन सहित तमाम कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे।


Spread the love