देवभूमि जन हुंकार, मुरादाबाद / बरेली: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद से एक अत्यंत मर्मस्पर्शी, झकझोर देने वाली और सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आ रही है। सरकारी नौकरी पाने का सपना लेकर मुरादाबाद पहुंचे बरेली के एक होनहार युवक की कहानी अब उसके परिवार के लिए जिंदगी भर का नासूर बन गई है। जिस युवक ने बीते 17 सितंबर को ही अपना 27वां जन्मदिन मनाया था, अगले ही दिन वह होमगार्ड भर्ती की दौड़ में शामिल होने गया और फिर कभी जिंदा वापस नहीं लौटा। परिजनों ने भर्ती स्थल पर चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी और लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है।
मृतक शिवम यादव की पत्नी कोमल यादव ने नम आंखों से बताया कि उनके पति पढ़ाई में बेहद मेधावी और प्रतिभावान थे। उन्होंने B.Tech, B.Ed, CTET और UP-TET जैसी कई प्रतिष्ठित परीक्षाएं पास की थीं। इसके अलावा उन्होंने रेलवे लोको पायलट की प्री और मेंस परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी तथा लेखपाल व रेलवे ग्रुप-D जैसी परीक्षाओं में भी हिस्सा लिया था।
शिवम बच्चों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स की कोचिंग पढ़ाकर अच्छी कमाई भी कर रहे थे, लेकिन उनका एकमात्र सपना एक स्थायी सरकारी नौकरी हासिल कर अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करना था। चार भाइयों में दूसरे नंबर के शिवम के बड़े भाई अंकित और छोटे भाई सचिन वकील हैं, जबकि सबसे छोटा भाई आदित्य चौथी कक्षा में पढ़ता है। शिवम की शादी करीब पांच साल पहले हुई थी और उनकी ढाई साल की मासूम बेटी शैली है।
परिजनों के मुताबिक, 17 सितंबर को शिवम का जन्मदिन था। उन्होंने व्रत रखा था और शाम को व्रत खोलने के बाद पत्नी से कहा था कि अगली बार जन्मदिन और भी धूमधाम से मनाएंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उसी रात करीब साढ़े दस बजे उन्होंने भर्ती के लिए कपड़े पहने और रात ग्यारह बजे बस से मुरादाबाद के लिए निकल पड़े।
दिनांक 18 सितंबर को मुरादाबाद के कांठ रोड स्थित 9वीं पीएसी ग्राउंड में होमगार्ड भर्ती का फिजिकल टेस्ट चल रहा था। इसी दौरान शिवम 4.8 किलोमीटर की दौड़ पूरी कर रहे थे। बताया गया कि दौड़ के 12वें राउंड के दौरान अचानक उनकी तबियत बिगड़ी और वह मैदान पर अचेत होकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शिवम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शिवम के पिता विनोद यादव ने शासन-प्रशासन और भर्ती बोर्ड पर बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्हें बेटे की हालत बिगड़ने की जानकारी मिली, तो वह तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन गेट पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
पिता का रोते हुए कहना है कि उन्होंने काफी मिन्नतें और गुहार लगाई, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। जब तक वह किसी तरह अपने बेटे तक पहुंच पाए, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और शिवम जमीन पर दम तोड़ चुके थे। पिता का आरोप है कि भर्ती स्थल पर डॉक्टरों और आपातकालीन मेडिकल सुविधाओं की भारी कमी थी, जिसके कारण समय पर इलाज न मिलने से उनके बेटे की सांसें थम गईं।
अब पत्नी कोमल, ढाई साल की मासूम बेटी शैली और माता-पिता अपने होनहार बेटे की यादों के सहारे जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। इस घटना ने एक बार फिर शारीरिक दक्षता परीक्षाओं (फिजिकल टेस्ट) के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और मेडिकल इमरजेंसी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
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