सरकारी विज्ञापन
National Legal Concept Representing Supreme Court Directive for Railway Passenger Insurance and Counter Tickets
Spread the love

देवभूमि जन हुंकार, नई दिल्ली / देहरादून: देश के करोड़ों रेल यात्रियों के लिए सुरक्षा और बीमा अधिकारों के लिहाज से सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से एक बहुत ही राहतभरी और कड़े निर्देशों वाली खबर सामने आ रही है। रेल यात्रियों को पुख्ता सुरक्षा कवच और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने भारतीय रेलवे को आगामी 27 अक्टूबर से काउंटर से खरीदे जाने वाले टिकटों पर भी यात्रियों के लिए बीमा की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस आदेश के क्रियान्वयन में यदि किसी भी प्रकार की विफलता या लापरवाही पाई जाती है, तो उसके लिए रेलवे बोर्ड सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा।

यह भी पढ़ें 👉देहरादून में बैठकर विदेशियों को चूना लगा रहा था फर्जी कॉल सेंटर: 5 शातिर गिरफ्तार, ऐसे करते थे ठगी

ओडिशा रेल हादसे के बाद दायर याचिका से जुड़ा है पूरा मामला

यह महत्वपूर्ण कानूनी मामला जून 2023 में ओडिशा में हुए एक भीषण और दर्दनाक रेल हादसे के बाद दायर की गई एक जनहित याचिका की सुनवाई से जुड़ा हुआ है। उस याचिका में हादसे की निष्पक्ष जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय आयोग गठित करने की माँग की गई थी। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने इस दुर्घटना के लिए आधुनिक रेल सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ (Kavach) को समय पर लागू नहीं किए जाने को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए देश की सभी ट्रेनों में इस सुरक्षा प्रणाली को जल्द से जल्द लागू करने की माँग भी उठाई थी।

गत 6 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की दो सदस्यीय खंडपीठ ने यात्री सुरक्षा से जुड़े कई अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण पहलुओं को भी अपने विचार के दायरे में शामिल किया। इन गंभीर मुद्दों में रेलवे स्टेशनों पर फुट ओवरब्रिज (FOB) की स्थिति, रेल पटरियों के दोनों किनारों पर बाड़ लगाने (Fencing) की व्यवस्था और सबसे बढ़कर काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को ऑनलाइन टिकटों की तरह बीमा सुविधा उपलब्ध न होना जैसे विषय प्रमुखता से शामिल थे।

यह भी पढ़ें 👉रामनगर में घर का ताला तोड़कर चोरी करने वाला शातिर गिरफ्तार: पुलिस ने नकदी और चोरी की बाइक के साथ दबोचा

केंद्र सरकार का अनुरोध और अदालत का रुख

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने अदालत से एक अंतिम अवसर देने का विनम्र अनुरोध किया। उन्होंने पीठ को आश्वस्त किया कि रेलवे की ओर से पिछले एक वर्ष के दौरान जमीन पर किए गए वास्तविक कार्यों और सुरक्षा से जुड़े निर्धारित लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाने के असली कारणों को स्पष्ट करते हुए एक विस्तृत हलफनामा (Affidavit) अदालत में दाखिल किया जाएगा। विशेष रूप से, रेल पटरियों के किनारे सुरक्षा के लिए बाड़ लगाने के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में हुई प्रशासनिक देरी के संबंध में पुख्ता जानकारी देने की बात कही गई।

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए फिलहाल रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से तलब करने संबंधी अपने पूर्व आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया है।

यह भी पढ़ें 👉नाराज पत्नी को मनाने का अजीब तरीका: पत्नी के जाने से दुखी युवक चढ़ा मोबाइल टावर पर, पुलिस ने ऐसे उतारा

रेल यात्रियों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कदम

सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त निर्देश को देश के आम रेल यात्रियों की सुरक्षा और उन्हें अनिवार्य बीमा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। अब रेलवे प्रशासन को निर्धारित समयसीमा के भीतर काउंटर टिकट खरीदने वाले यात्रियों के लिए भी बीमा व्यवस्था का सुगम और पारदर्शी क्रियान्वयन करना होगा।

👉 देवभूमि जन हुंकार व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ को लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सब्स्क्राइब करें


Spread the love

By admin