देवभूमि जन हुंकार, मेरठ / देहरादून: उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ से मानवता को झकझोर कर रख देने वाले बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में न्यायपालिका ने एक अत्यंत कड़ा, नजीर बनने वाला और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मेरठ की अदालत ने क्रूरता की सारी हदें पार कर देने वाले इस दोहरे/जघन्य कृत्य में मुख्य आरोपी महिला मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड (फांसी की सजा) सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत ने दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी अधिरोपण किया है।
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ड्रम के अंदर सीमेंट से छिपाए गए थे शव के टुकड़े, छोटे भाई के पहुँचने पर खुला था राज
यह खौफनाक वारदात 3 मार्च 2025 को अंजाम दी गई थी। आरोपी मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ राजपूत की निर्मम हत्या कर दी थी। हत्या के बाद साक्ष्यों को मिटाने के लिए उन्होंने शव के कई टुकड़े किए और उन्हें एक नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम के अंदर रखकर ऊपर से सीमेंट से पूरी तरह छिपाने की घिनौनी कोशिश की थी।
यह सनसनीखेज राज तब खुला जब गत 18 मार्च को सौरभ का छोटा भाई राहुल उनके घर पहुँचा। घर के अंदर से आ रही तीव्र दुर्गंध और मुस्कान व साहिल की संदिग्ध हरकतों से राहुल को अनहोनी का संदेह हुआ। उसने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जब उस नीले ड्रम को खोला, तो अंदर से सौरभ राजपूत के क्षत-विक्षत शव के अवशेष बरामद हुए, जिसे देख पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
22 गवाहों के बयान, फॉरेंसिक जांच और सीसीटीवी फुटेज बने सजा का आधार
अदालत में चले लंबे और कड़े विचारणीय मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ बेहद मजबूत और अकाट्य सबूत पेश किए। मामले की सुनवाई करते हुए अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इसके अलावा कई अहम फॉरेंसिक साक्ष्य अदालत में रखे गए, जिनमें मुख्य रूप से:
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हत्या में प्रयुक्त हथियारों की बरामदगी
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वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट
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कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर की गई बातचीत
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विभिन्न होटलों के सीसीटीवी फुटेज
इसके अतिरिक्त, उस नीले ड्रम को खोलने वाले व्यक्ति, घटनास्थल का पंचनामा तैयार करने वाले पुलिस अधिकारियों तथा सौरभ का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर की गवाही ने इस पूरे मामले की कड़ी से कड़ी जोड़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गत 30 सितंबर को अदालत ने तमाम सबूतों और गवाहों के आधार पर मुस्कान और साहिल शुक्ला को हत्या का दोषी करार दे दिया था।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनी गई दलीलें, बचाव पक्ष की अपील खारिज
सजा के बिंदु पर सुनवाई से पहले जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों दोषियों का पक्ष व्यक्तिगत रूप से सुना। इस दौरान दोषी मुस्कान ने अपनी छोटी-छोटी बेटियों की देखभाल और परवरिश का हवाला देते हुए नरमी बरतने की गुहार लगाई, जबकि दूसरा दोषी साहिल शुक्ला पूरी कार्यवाही के दौरान पूरी तरह चुप रहा।
सजा पर बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने इस जघन्य और क्रूर अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ (Rarest of the Rare) श्रेणी में मानते हुए दोनों के लिए मृत्युदंड (फांसी) की पुरजोर माँग की। वहीं दूसरी ओर, बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने मुस्कान की दो मासूम बेटियों और उसके बुजुर्ग माता-पिता का हवाला देते हुए अदालत से कम सजा देने की अपील की थी।
अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें, अपराध की क्रूरता और पत्रावली पर उपलब्ध अकाट्य साक्ष्यों का सूक्ष्म अध्ययन करने के बाद बचाव पक्ष की नरमी की अपील को खारिज कर दिया। जिला जज ने दोनों दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाने का मृत्युदंड सुनाकर समाज में यह कड़ा संदेश दिया है कि जघन्य अपराधों और अमानवीय कृत्यों का अंत न्याय के कटघरे में कठोर सजा के साथ ही होता है।
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