देवभूमि जन हुंकार, रामनगर / नैनीताल: देवभूमि उत्तराखंड में सरकारी जमीनों, जंगलों और नदी किनारों पर अवैध अतिक्रमण करने वाले भू-माफियाओं और असामाजिक तत्वों के खिलाफ धामी सरकार और जिला प्रशासन ने अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सबसे आक्रामक कार्रवाई शुरू कर दी है। नैनीताल जनपद के रामनगर क्षेत्र में कोसी नदी के ठीक किनारे सरकारी वन भूमि पर बड़े पैमाने पर कब्जा कर बसाई गई अवैध मुस्लिम बस्ती के खिलाफ आज तड़के सुबह से ही प्रशासन का भारी भरकम अमला बुलडोजर और जेसीबी लेकर कूद पड़ा। इस ताबड़तोड़ और ऐतिहासिक कार्रवाई से भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों में भारी हड़कंप मच गया है।
कांग्रेस शासनकाल में फारेस्ट की 14 हेक्टेयर जमीन पर बसाई गई थी ‘पुछड़ी बस्ती’
प्रशासनिक सूत्रों और वन विभाग से प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, रामनगर में कोसी नदी के इर्द-गिर्द वन विभाग की करीब 14 हेक्टेयर (लगभग 35 एकड़) अत्यंत बेशकीमती जमीन पर सुनियोजित तरीके से कब्जा कर लिया गया था। जानकारी सामने आई है कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करते हुए इस फारेस्ट लैंड पर अवैध रूप से बस्ती बसा दी गई थी, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘पुछड़ी बस्ती’ के नाम से जाना जाता था।
अवैध कब्जे की इस लंबी दास्तान को खत्म करने के लिए जिला प्रशासन ने पुख्ता होमवर्क किया। जिला प्रशासन की ओर से पहले ही सभी आवश्यक विधिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई थीं और इलाके में मुनादी (घोषणा) करवा दी गई थी कि अवैध कब्जेधारी खुद अपनी मर्जी से जमीन खाली कर दें।
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प्रशासनिक सख्ती देख कई लोगों ने खुद तोड़े मकान, बुलडोजर ने 86 पक्के मकान किए जमींदोज
कार्रवाई वाले दिन से ठीक एक शाम पहले पुलिस और वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने अपने पूरे दल-बल के साथ विस्तृत ब्रीफिंग की थी। प्रशासन के इस आक्रामक और अडिग तेवर को भांपते हुए कई अतिक्रमणकारियों और अवैध कब्जाधारियों ने खुद ही अपने मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया था।
इसके बावजूद जो लोग अवैध कब्जा जमाए बैठे रहे, उन पर आज सुबह तड़के प्रशासन का बुलडोजर पूरी ताकत से गरजा। वन प्रशासन, जिला पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 86 पक्के मकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और फारेस्ट लैंड पर अपना वैध कब्जा वापस स्थापित कर लिया।
भू-माफिया ताहिर मुल्ला पर शिकंजा, यूपी के लोगों को बेची थी जमीन
इस पूरे अवैध कब्जे के पीछे मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में ताहिर मुल्ला नामक भू-माफिया का नाम प्रमुखता से सामने आया है। शुरुआती जाँच और जानकारियों के मुताबिक, ताहिर मुल्ला ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से लोगों को लाकर फारेस्ट विभाग की बेशकीमती जमीन अवैध रूप से बेच डाली थी और राजनीतिक संरक्षण के बल पर यह मुस्लिम पुछड़ी बस्ती खड़ी कर दी थी। वन विभाग द्वारा इस शातिर भू-माफिया के खिलाफ पुलिस थाने में और अपने विभागीय रिकॉर्ड में गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। अतिक्रमण हटाने के इस अभियान के दौरान पुलिस अब इस भूमि-तस्कर ताहिर मुल्ला की भी सरगर्मी से तलाश कर रही है।
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डीएम ललित मोहन रयाल के निर्देश पर छावनी में बदला इलाका, पीएसी की 3 कंपनियां तैनात
इस संवेदनशील और बड़े पैमाने पर चलाए गए ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। डीएम रयाल ने बताया कि पूरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए संपूर्ण इलाके को 2 सुपर जोन, 7 जोन, 14 सेक्टर और 6 बैरियर में विभाजित किया गया था।
सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालने के लिए मौके पर 5 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 5 एएसपी, 6 सीओ, 25 इंस्पेक्टर, 82 दरोगा और पीएसी (PAC) की 3 कंपनियों सहित भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। प्रशासन का यह स्पष्ट संदेश है कि सरकारी भूमि और वन संपदा पर अवैध कब्जा करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पूरी भूमि को पूरी तरह कब्जा मुक्त कराने के बाद इसे विधिवत रूप से वन विभाग के हवाले किया जा रहा है।
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