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Uttarakhand Education Concept Representing CDO Nainital School Inspection and Student Interaction
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देवभूमि जन हुंकार, नैनीताल: देवभूमि उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानने और छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक स्तर को परखने के लिए अब प्रशासनिक अधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया है। नैनीताल जनपद में विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, बच्चों के वास्तविक अधिगम (Learning) स्तर का परीक्षण करने तथा आधुनिक सुविधाओं की प्रभावशीलता का आकलन करने के उद्देश्य से मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अरविन्द कुमार पाण्डे ने पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का औचक एवं सघन निरीक्षण किया।

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कक्षाओं में पहुँचे सीडीओ, छात्राओं से पूछे हिंदी, अंग्रेजी और गणित के सवाल

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने किसी औपचारिकता के बिना सीधे विभिन्न कक्षा-कक्षों का रुख किया। उन्होंने छात्राओं से सीधा संवाद स्थापित किया और हिंदी, अंग्रेजी, गणित व अन्य मुख्य विषयों से जुड़े सवाल पूछकर उनके विषयगत ज्ञान, तार्किक क्षमता और वास्तविक अधिगम स्तर का कड़ाई से परीक्षण किया। उन्होंने छात्राओं से उनकी नियमित पढ़ाई की शैली, शिक्षण पद्धति और स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं का फीडबैक भी लिया।

सीडीओ ने शिक्षकों को दो टूक शब्दों में निर्देशित किया कि शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन केवल परीक्षा के रटे-रटाए परिणामों और नामांकन के आंकड़ों के आधार पर नहीं किया जा सकता। यह देखना सबसे जरूरी है कि विद्यार्थी कक्षा के अनुरूप निर्धारित दक्षताओं को वास्तव में सीख पा रहे हैं या नहीं। उन्होंने एनईपी-2020 (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) के अनुरूप गतिविधि आधारित और व्यावहारिक शिक्षण व्यवस्था लागू करने पर विशेष बल दिया।

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लैब, लाइब्रेरी और मिड-डे मील की परखी गई गुणवत्ता, संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर

निरीक्षण के इस क्रम में मुख्य विकास अधिकारी ने विद्यालय परिसर, साइंस लैब, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, आईसीटी लैब, व्यावसायिक शिक्षा कक्षों, खेल मैदान और शिक्षण-अधिगम सामग्री का बेहद बारीकी से निरीक्षण किया।

उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि विद्यालय में उपलब्ध अत्याधुनिक संसाधनों और उपकरणों का उपयोग केवल कागजी औपचारिकता या प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आईसीटी लैब और पुस्तकालयों का नियमित संचालन हो ताकि हर छात्रा को तकनीक आधारित शिक्षा के पर्याप्त अवसर मिल सकें। इसके साथ ही उन्होंने मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता की भी गहन जाँच की और रसोइयों तथा प्रभारियों को बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी तरह पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन परोसने के सख्त निर्देश दिए।

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कमजोर छात्राओं के लिए ‘रेमेडियल टीचिंग’ अनिवार्य, लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही

शिक्षण-प्रक्रिया की समीक्षा के दौरान सीडीओ ने निर्देश दिए कि स्कूल में हर छात्रा के विषयवार प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन किया जाए। जिन बच्चियों का शैक्षणिक स्तर तय मानकों से नीचे पाया जाता है, उनके लिए तुरंत विशेष उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की व्यवस्था की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उपस्थिति दर्ज कराना और कोर्स पूरा करना उपलब्धि नहीं है, बल्कि हर बच्चे की प्रगति पर नजर रखना शिक्षक की नैतिक जिम्मेदारी है।

निरीक्षण के अंत में उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) एस.सी. आर्या और विद्यालय के प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि सामने आई सभी कमियों का समयबद्ध और प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए। इस अवसर पर जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी मुकेश नेगी और जिला समन्वयक रविन्द्र तिवारी सहित शिक्षा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रशासन के इस कड़े रुख से पूरे शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।

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By admin