उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादलों को लेकर सचिव रविनाथ रमन द्वारा जारी मुख्य आदेश
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🚨 उत्तराखंड: शिक्षकों के तबादलों पर आई बड़ी खबर, शासन ने जारी किया कड़ा आदेश! जानिए किसे मिलेगी राहत और किसका फंसा पेंच…

देहरादून:उत्तराखंड में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण सत्र 2026-27 को लेकर शासन स्तर से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा विधिक आदेश जारी किया गया है। सचिव रविनाथ रमन की ओर से महानिदेशक (विद्यालयी शिक्षा) और निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) को भेजे गए इस आधिकारिक पत्र में साफ किया गया है कि गंभीर बीमारियों, दिव्यांगता और विभिन्न कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे शिक्षकों के मामलों में कमेटी की संस्तुति के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाए। वहीं दूसरी ओर, सुगम से दुर्गम और दुर्गम से सुगम क्षेत्रों में सामान्य अनुरोध के आधार पर होने वाले कई तबादलों पर फिलहाल पेंच फंस गया है, और इस प्रकरण को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के पाले में डाल दिया गया है।

जारी शासनादेश के अनुसार, उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा-27 के अंतर्गत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा विगत 24 अप्रैल 2026 को संपन्न बैठक में गंभीर मामलों पर गहन विचार-विमर्श किया गया था। इस बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत कुल 04 प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक, 91 प्रवक्ता, 97 सहायक अध्यापक एलटी (गढ़वाल मंडल) व 73 सहायक अध्यापक एलटी (कुमाऊं मंडल) के आवेदनों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उनके स्वयं अथवा पति/पत्नी की गंभीर रोगग्रस्तता, विकलांगता, मानसिक रूप से विक्षिप्त, लाचार/दिव्यांग/बीमार बच्चों, विधवा/विधुर/तलाकशुदा/परित्यक्ता, आपदा प्रभावित एवं माता/पिता की गंभीर बीमारी के आधार पर स्थानांतरण के प्रस्तावों को हरी झंडी (संस्तुति) दी गई है।

शासन ने आदेशित किया है कि स्थानांतरण अधिनियम की धारा 17(1)(ख) के अंतर्गत (एक) से (पांच) में वर्णित इन गंभीर एवं मानवीय आधारों पर प्राप्त आवेदनों तथा धारा-27 के अंतर्गत गठित समिति की संस्तुति के अनुसार, निर्धारित समय अवधि के भीतर नियुक्ति प्राधिकारी के स्तर पर गठित समितियों के माध्यम से नियमानुसार तत्काल स्थानांतरण की अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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सुगम-दुर्गम आधारित सामान्य अनुरोध वाले मामलों पर लगी रोक

इस बड़े आदेश में एक अहम तकनीकी और विधिक पेंच का भी उल्लेख है। सचिव रविनाथ रमन ने स्पष्ट किया है कि माननीय उच्च न्यायालय, नैनीताल द्वारा रिट याचिका संख्या-533/2025 में दिनांक 16 दिसंबर 2025 को पारित निर्णय के आलोक में सुगम/दुर्गम के आधार पर किए जाने वाले स्थानांतरणों पर रोक लगाई गई है। इसके चलते स्थानांतरण अधिनियम की धारा 17(1)(ख) के अंतर्गत (छ:) एवं (सात) में वर्णित ‘दुर्गम से दुर्गम’ एवं ‘सुगम से दुर्गम’ क्षेत्र में स्थानांतरण हेतु किए गए सामान्य अनुरोधों के आवेदनों पर फिलहाल निर्णय रोक दिया गया है।

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इस संवेदनशील विधिक स्थिति को देखते हुए समिति की संस्तुति के आधार पर उक्त प्रकरण को ‘कार्मिक एवं सतर्कता विभाग’ को विस्तृत विचार और विधिक परामर्श हेतु संदर्भित किया गया है। शासन ने साफ किया है कि कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से अपेक्षित विधिक परामर्श प्राप्त होने के उपरांत ही इन विशिष्ट (छ: और सात) श्रेणियों के आवेदनों पर पृथक से अंतिम आदेश निर्गत किए जाएंगे। तब तक महानिदेशक और निदेशक स्तर से धारा-27 के तहत शासन को भेजे गए अन्य सभी मूल आवेदनों को वापस करते हुए केवल संस्तुति प्राप्त गंभीर मामलों में ही तय समय में विधिक पारदर्शी कार्रवाई पूरी करने को कहा गया है।


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