अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी
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🚨चंपत राय का पूर्व ड्राइवर निकला ₹50 करोड़ का आसामी; बंद कमरे में रात भर चली पूछताछ, 8 गिरफ्तार, जानिए कौन है ये ‘टिन्नू’… 👇

अयोध्या:पवित्र नगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के आस्था रूपी चढ़ावे में करोड़ों रुपये की विधिक और शर्मनाक सेंधमारी का बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दानपात्रों से चढ़ावे की रकम चोरी करने के मामले में पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) ने एक बहुत बड़ा विधिक एक्शन लेते हुए सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बीती गुरुवार की शाम को हिरासत में लिए जाने के बाद अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में इन सभी से पूरी रात विधिक और कड़ाई से पूछताछ की गई, जिसके बाद शुक्रवार की सुबह इनकी औपचारिक गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई। पुलिस आज ही इन सभी आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश करने जा रही है।

कैशियरों की फौज और सुपरवाइजरों का नेटवर्क

चढ़ावा चोरी के इस हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट में गिरफ्तार किए गए आठों लोग सीधे तौर पर राम मंदिर में आने वाले दान की रकम की काउंटिंग (गिनती) और प्रबंधन से जुड़े हुए थे। पकड़े गए आरोपियों में रमाकांत उर्फ टिन्नू यादव (रामशंकर यादव), सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। पुलिस के विधिक खुलासे के अनुसार, इनमें से छह लोग सीधे तौर पर कैशियर के पद पर तैनात थे, जो सुभाष श्रीवास्तव की सीधी निगरानी में चढ़ावे का पाई-पाई का हिसाब-किताब रखते थे। वहीं, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड टिन्नू यादव कैश काउंटिंग को सुपरवाइज़ करने से लेकर उस भारी रकम को बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने के विधिक कार्य को संभालता था।

ट्रस्ट के सदस्य की तहरीर पर SIT की जांच के बाद हुआ बड़ा एक्शन

इस महा-घोटाले की भनक लगते ही राम जन्मभूमि ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित विधिक तहरीर पर राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन स्तर से इसकी जांच एसआईटी (SIT) को सौंपी गई। एसआईटी द्वारा पेश की गई गोपनीय विधिक रिपोर्ट में चोरी की पुष्टि होने के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आई और बिना किसी देरी के सभी आठ आरोपियों को दबोच लिया गया।

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ऑटो ड्राइवर से 50 करोड़ का साम्राज्य: ऐसे चलता था ‘टिन्नू’ का हुक्म

अब तक की विधिक विवेचना और जांच में जो सबसे चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है, वह है रामशंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू यादव’ का फर्श से अर्श तक पहुंचने का खौफनाक सफर। एक जमाने में टिन्नू के पिता चाय बेचते थे और वह खुद अयोध्या की सड़कों पर ऑटो चलाता था। इसके बाद वह ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर बना। ड्राइवर रहने के दौरान उसने ऐसा विश्वास जीता कि मंदिर प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण विधिक और वित्तीय जिम्मेदारियां चंपत राय द्वारा टिन्नू यादव को ही सौंप दी गईं। देखते ही देखते दानपात्रों के बॉक्सेज की चाबियां टिन्नू के पास आ गईं।

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हालत यह थी कि राम मंदिर परिसर के भीतर सिर्फ टिन्नू यादव का ही हुक्म चलता था। मंदिर में किस कैशियर को नौकरी पर रखना है, चढ़ावे की गिनती कौन करेगा और यहाँ तक कि परिसर में सुरक्षा हेतु पुलिस के जवान कहाँ-कहाँ तैनात होंगे, यह सब अकेले टिन्नू यादव ही तय करता था। इसी विधिक एकाधिकार का फायदा उठाकर उसने चढ़ावे की राशि में करोड़ों की चोरी की। आज स्थिति यह है कि ऑटो चलाने वाले टिन्नू यादव के पास अयोध्या और लखनऊ में ₹50 करोड़ से अधिक की बेनामी और आलीशान विधिक संपत्तियां हैं, जिसमें इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास 70 कमरों का एक बहुत बड़ा हॉस्टल, आलीशान कोठियां, लग्जरी गाड़ियां और अयोध्या के कई नामी होटलों व रेस्टोरेंटों में बेनामी पार्टनरशिप शामिल है। एफआईआर में नाम आने के बाद अब विधिक एजेंसियां टिन्नू यादव के इस पूरे अवैध आर्थिक साम्राज्य की गहराई से जांच कर रही हैं।


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