इंजीनियर बनने की जिद, लेकिन ट्राइसाइकिल तक नहीं मिली! गया के 3 फीट के दिव्यांग भाई-बहन दीपक और करिश्मा की रुला देने वाली कहानी। बारिश में मुहाने नदी रोकती है पढ़ाई।

देवभूमि जन हुंकार, गया/बिहार (11 अगस्त 2026): कद छोटा है, आर्थिक हालात बेहद कमजोर हैं और शारीरिक चुनौतियां कदम-कदम पर रास्ता रोकती हैं, लेकिन बिहार के गया जिले अंतर्गत मोहनपुर प्रखंड के एरकी गांव के भाई-बहन दीपक और करिश्मा ने अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। दोनों का सपना देश का सफल इंजीनियर बनने का है। किताबों के बीच अपना उज्ज्वल भविष्य तलाश रहे इन दोनों भाई-बहनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अत्यधिक गरीबी के साथ-साथ सरकारी सुविधाओं का न मिल पाना है।
3 फीट का कद, पर बुलंद इरादे
18 वर्षीय दीपक और 16 वर्षीय करिश्मा जन्म से दिव्यांग हैं। दीपक का कद करीब तीन फीट और करिश्मा का कद करीब साढ़े तीन फीट है। तमाम शारीरिक व सामाजिक परेशानियों के बावजूद दोनों ने पढ़ाई जारी रखी। करिश्मा फिलहाल इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही हैं और इंजीनियर बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं। वहीं, दीपक ने वर्ष 2025 में प्रथम श्रेणी (फर्स्ट डिवीजन) से मैट्रिक पास किया था। हालांकि, पैर की गंभीर समस्या और आर्थिक तंगी के कारण उसकी आगे की पढ़ाई फिलहाल रुकी हुई है।
गरीबी में खेत बेचकर बच्चों को पढ़ा रहे माता-पिता
दीपक और करिश्मा के माता-पिता नरसिंह प्रसाद और जगनी देवी बेहद सीमित आर्थिक संसाधनों में अपना परिवार चला रहे हैं। माता-पिता गांव में मजदूरी करने के साथ-साथ अपनी बची-कुची थोड़ी-बहुत जमीन बेचकर बच्चों की पढ़ाई और इलाज का भारी खर्च उठा रहे हैं।
मां जगनी देवी को पूरी उम्मीद है कि उनकी बेटी करिश्मा एक दिन जरूर इंजीनियर बनेगी। वहीं दीपक के लिए पूरा परिवार बेहतर डॉक्टरी इलाज और सरकारी मदद की उम्मीद लगाए बैठा है।
पैर टूटने के बाद दीपक की पढ़ाई थमी, कॉमेडी में भी दिलचस्पी
दीपक के मुताबिक, स्कूल में पढ़ाई के दौरान अचानक गिरने से उसका एक पैर टूट गया था। इलाज के बाद भी उसकी चलने-फिरने की समस्या दूर नहीं हो सकी। अब वह एक छोटी साइकिल के सहारे किसी तरह आवाजाही करता है।
मैट्रिक में प्रथम श्रेणी हासिल करने के बावजूद आर्थिक स्थिति और शारीरिक परेशानी के कारण वह आगे दाखिला नहीं ले सका। दीपक का कहना है कि यदि उसे बेहतर इलाज और सरकारी सहायता मिल जाए तो वह दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहता है। इसके साथ ही वह हास्य क्षेत्र (कॉमेडी) में भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है और प्रसिद्ध हास्य अभिनेता जॉनी लीवर से काफी प्रभावित है।
ट्राइसाइकिल के लिए लगा रहे चक्कर, अब तक नहीं मिली सुविधा
दीपक और करिश्मा दोनों को सुगम आवाजाही के लिए बैटरी या मैनुअल ट्राइसाइकिल की सख्त जरूरत है। परिवार का कहना है कि स्थानीय ब्लॉक व पंचायत स्तर पर कई बार इसकी मांग की गई और हर बार आश्वासन भी मिला, लेकिन आज तक उन्हें ट्राइसाइकिल नसीब नहीं हो सकी है। दीपक का कहना है कि अगर ट्राइसाइकिल मिल जाए तो उसके लिए बाहर निकलना और अपनी पढ़ाई-इलाज से जुड़े प्रयास करना काफी आसान हो जाएगा।
बारिश में मुहाने नदी बन जाती है पढ़ाई की सबसे बड़ी बाधा
करिश्मा की पढ़ाई के सामने एक अलग ही तरह की प्राकृतिक चुनौती है। उनके गांव के पास से गुजरने वाली मुहाने नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर काफी बढ़ जाता है।
सामान्य दिनों में जिस हाई स्कूल तक करीब एक से डेढ़ किलोमीटर में पहुंचा जा सकता है, बारिश के दौरान नदी में उफान आने पर बच्चों को करीब 15 किलोमीटर का लंबा व कठिन रास्ता तय करना पड़ता है। ऐसे में करिश्मा सहित गांव के कई छोटे व दिव्यांग बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते और उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है। करिश्मा दृढ़ता से कहती हैं— “चाहे जैसे भी हो, मैं इंजीनियर बनूंगी और सिर्फ सपना नहीं देखती, बल्कि बनकर दिखाऊंगी।”
मुखिया का पक्ष और प्रशासन पर यक्ष प्रश्न
मामले पर एरकी पंचायत के मुखिया प्रदीप कुमार के अनुसार, पंचायत की ओर से 5 जरूरतमंदों के नाम की अनुशंसा भेजी गई थी, जिनमें से 3 लोगों को ट्राइसाइकिल मिल चुकी है। दीपक और करिश्मा को अभी तक यह सुविधा नहीं मिल पाई है, लेकिन उन्हें जल्द ट्राइसाइकिल दिलाने का प्रयास जारी है। उन्होंने यह भी माना कि मुहाने नदी पर पुल न होने से पंचायत के कई गांवों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
मामले में प्रखंड विकास अधिकारी (BDO), मोहनपुर का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क स्थापित नहीं हो सका। अब देखना यह होगा कि क्या संवेदनहीन बने तंत्र से इन दो होनहार दिव्यांग बच्चों को समय पर मदद मिल पाती है या नहीं।
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