रात 230 बजे वापस लौटा निहंगों का जत्था
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सूझबूझ की काउंसिलिंग से टला उत्तराखंड का बड़ा संकट, भारी पुलिस सुरक्षा के बीच रात 2:30 बजे वापस लौटा निहंगों का जत्था!

देहरादून: उत्तराखंड में निहंग सिखों के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और ‘उत्तराखंड कूच’ के ऐलान के बाद गुरुवार रात राजधानी देहरादून में बेहद तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। पुलिस और खुफिया तंत्र को चकमा देकर निहंगों का एक जत्था आधी रात को सीधे देहरादून के पॉश इलाके रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारे में जा पहुंचा, जिससे पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में भारी पुलिस बल और पीएसी ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। जिलाधिकारी (DM) और एसएसपी (SSP) खुद आधी रात को कमान संभालने जमीन पर उतरे। कई घंटों तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे और कई दौर की विधिक व प्रशासनिक वार्ताओं के बाद आखिरकार रात करीब २:३० बजे निहंग जत्था वापस लौटने पर राजी हुआ, जिसके बाद पुलिस अभिरक्षा में उन्हें हिमाचल सीमा तक सुरक्षित छोड़ा गया।

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पूरा मामला १६ जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच हुए हिंसक विवाद से जुड़ा है, जिसमें चार लोग घायल हुए थे। इस घटना के विरोध में निहंगों द्वारा उत्तराखंड कूच की घोषणा के बाद विकासनगर के कुल्हाल बॉर्डर सहित हिमाचल प्रदेश से सटी सभी सीमाओं पर पैरामिलिट्री फोर्स, खुफिया एजेंसियों, एसडीएम और एसपी देहात के नेतृत्व में सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। लेकिन निहंगों का जत्था मुख्य हाईवे और पुलिस की पैनी नजरों से बचते हुए चोर रास्तों और अलग-अलग मार्गों से चुपचाप देहरादून के रेसकोर्स गुरुद्वारे पहुंच गया। इसकी भनक लगते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई और पूरे शहर के संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस फोर्स मुस्तैद कर दी गई।

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बढ़ते सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल देर रात तक खुद ग्राउंड जीरो पर डटे रहे। गुरुद्वारा परिसर के भीतर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने निहंगों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बंद कमरे में बातचीत की। सूत्रों के अनुसार, पांवटा साहिब में हुई शुरुआती बातचीत के दौरान निहंगों ने कर्णप्रयाग प्रकरण में विधिक रूप से गिरफ्तार किए गए लोगों को पंजाब की जेलों में भेजने और सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब जाने की विधिक अनुमति मांगी थी। हालांकि, देहरादून में हुई देर रात की वार्ता में जिला प्रशासन ने विधिक मर्यादाओं और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें शांत कराया।

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कड़े विधिक रुख और सूझबूझ से की गई काउंसिलिंग के बाद मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ गया। रात करीब २:३० बजे निहंगों का यह जत्था दो जिप्सियों के माध्यम से वापस पांवटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) लौटने को तैयार हो गया। सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस की स्पेशल टीमों ने उन्हें अपनी अभिरक्षा (एस्कॉर्ट) में लिया और उत्तराखंड-हिमाचल सीमा तक सुरक्षित छोड़कर वापस लौटीं। देहरादून पुलिस प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में देहरादून, चमोली और आसपास के सभी क्षेत्रों में कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में और स्थिति सामान्य है। सुरक्षा एजेंसियां अब भी हाई अलर्ट पर हैं। प्रशासन ने आम जनता से सोशल मीडिया पर तैरने वाली किसी भी प्रकार की भड़काऊ और अपुष्ट अफवाहों पर ध्यान न देने की सख्त विधिक अपील की है।


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