हल्द्वानी महिला अस्पताल से डॉक्टरों के सामूहिक ट्रांसफर पर भड़कीं आशा वर्कर्स: युवा नेता हेमंत साहू संग SDM मोनिका के जरिए स्वास्थ्य मंत्री को भेजा कड़ा अल्टीमेटम! 👇
हल्द्वानी: उत्तराखंड में ‘तबादला एक्ट’ के तहत स्वास्थ्य विभाग में हुए बंपर ट्रांसफर के बाद अब धरातल पर विरोध के सुर बेहद तेज हो गए हैं। हल्द्वानी महिला अस्पताल से बड़ी संख्या में डॉक्टरों के सामूहिक तबादले किए जाने के विधिक फैसले के विरोध में ‘उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू)’ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियन कार्यकर्ताओं ने युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमन्त साहू के नेतृत्व में उपजिलाधिकारी (SDM) मोनिका के माध्यम से सूबे के स्वास्थ्य मंत्री को एक कड़ा और विधिक ज्ञापन प्रेषित किया है।
ज्ञापन के जरिए आशा कार्यकर्ताओं ने जनहित में इन सामूहिक तबादलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने तथा राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पदों को शीघ्र विधिक प्रक्रिया के तहत भरने की पुरजोर मांग की है।
‘गरीब मरीजों और गर्भवती महिलाओं के पेट पर लात मार रही सरकार’
यूनियन की अध्यक्ष रिंकी जोशी ने सरकार की तबादला नीति पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही बुनियादी सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी जैसी अनेक गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है।
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इलाज के लिए मचेगी त्राहि-त्राहि: उन्होंने कहा कि हल्द्वानी का महिला अस्पताल पूरे कुमाऊं मंडल का मुख्य केंद्र है। ऐसे समय में यहां से एक साथ बड़ी संख्या में डॉक्टरों के तबादले कर दिए जाने से गरीब मरीजों, गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और दूर-दराज के पर्वतीय क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले लोगों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।
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तबादले निरस्त करने की मांग: यूनियन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जनहित को ध्यान में रखते हुए इन तबादलों को तत्काल विधिक रूप से निरस्त नहीं किया गया, तो आशा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए विधिक रूप से बाध्य होंगी।
डॉक्टरों को हटाने के बजाय खाली पद भरे सरकार: हेमंत साहू
इस मौके पर आशा कार्यकर्ताओं के समर्थन में उतरे युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमन्त साहू ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर विधिक सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:
“सरकार को स्थापित और सुचारू रूप से चल रहे अस्पतालों से डॉक्टरों के थोकबंद तबादले करने के बजाय, प्रदेश के नीतिगत अभाव वाले सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, रेडियोलॉजिस्ट (Radiologist) तथा अन्य आवश्यक चिकित्सा विशेषज्ञों के रिक्त पड़े पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरना चाहिए।”
हेमंत साहू ने आगे कहा कि प्रदेश की लचर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और जनोपयोगी बनाने के लिए धरातल पर चौबीस घंटे सेवा देने वाली आशा कार्यकर्ताओं सहित स्वास्थ्य विभाग के सभी जमीनी कर्मियों के विधिक हितों और सुरक्षा का ध्यान रखा जाना बेहद आवश्यक है।
स्वास्थ्य मंत्री को भेजे गए इस विधिक मोर्चे और ज्ञापन प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से यूनियन अध्यक्ष रिंकी जोशी, युवा नेता हेमंत साहू, प्रीति रावत, सरोज रावत, रीना वाला, ज्योति रावत, राम भट्ट, प्रियंका शाही, रोशनी, कमला आर्य, गीता बोरा सहित भारी संख्या में आशा कार्यकर्ता एवं यूनियन के प्रमुख पदाधिकारी विधिक रूप से उपस्थित रहे।
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