नैनीताल जिला प्रशासन द्वारा निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के फायर सेफ्टी और सुरक्षा ऑडिट के निर्देश
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नैनीताल जिले में बड़ा एक्शन: सभी प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग सेंटरों का होगा सुरक्षा ऑडिट, DM ने दिए 19 बिंदुओं पर जांच के आदेश

नैनीताल/हल्द्वानी: देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षणिक संस्थानों में हुए दर्दनाक अग्निकांडों और हादसों से सबक लेते हुए नैनीताल जिला प्रशासन बेहद सख्त हो गया है। जिलाधिकारी (DM) ललित मोहन रयाल के निर्देश पर जनपद में संचालित सभी निजी विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों का व्यापक संयुक्त सुरक्षा ऑडिट (Joint Safety Audit) कराया जाएगा। इस विशेष अभियान के तहत फायर एनओसी, सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, भवन सुरक्षा और आपदा प्रबंधन समेत कुल १९ कड़े मानकों (बिंदुओं) पर सघन जांच की जाएगी। जिलाधिकारी ने जांच समितियों को प्राथमिकता के आधार पर अधिक छात्र संख्या वाले संस्थानों का निरीक्षण कर अगले १५ दिनों के भीतर अपनी विस्तृत संयुक्त आख्या जिला प्रशासन को सौंपने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इससे पूर्व ४ जून २०२६ को जनपद के होटलों, गेस्ट हाउसों, मॉलों और बैंक्वेट हॉलों आदि सार्वजनिक भवनों की जांच के लिए जो समितियां गठित की गई थीं, अब वही समितियां अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले समस्त निजी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों का भी सुरक्षा ऑडिट करेंगी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा, संरक्षा, स्वास्थ्य और आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) राज्य सरकार और जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इन 19 मुख्य बिंदुओं पर मुख्य रूप से होगी जांच:

१. मान्यता एवं पंजीकरण: संस्थान संचालन हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध अनुमति पत्रों की जांच।

२. फायर एनओसी: अग्निशमन विभाग द्वारा जारी ‘अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र’ की उपलब्धता और वैधता।

३. अग्निशमन उपकरण: फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट व आपातकालीन निकास की कार्यशीलता।

४. स्ट्रक्चरल सेफ्टी: भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और स्वीकृत क्षमता के सापेक्ष वास्तविक छात्र संख्या का मिलान।

५. इलेक्ट्रिकल सेफ्टी: बिजली के तारों, उपकरणों, डीजी सेट, इन्वर्टर और गैस भंडारण से जुड़े अग्नि जोखिमों की जांच।

६. अवरोध मुक्त मार्ग: कक्षाओं, गलियारों और सीढ़ियों की पर्याप्त चौड़ाई व वहां किसी भी प्रकार के अवरोध की स्थिति।

७. बैठने की व्यवस्था: कक्ष क्षमता के अनुसार सुरक्षित सिटिंग प्लान और आवश्यकता से अधिक भीड़भाड़ की जांच।

८. आपदा प्रबंधन योजना: संस्थान के भीतर डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान और इवैक्यूएशन मैप (निकासी मानचित्र) का होना।

९. मॉक ड्रिल व ट्रेनिंग: छात्रों और शिक्षकों के लिए नियमित मॉक ड्रिल तथा कर्मचारियों को फायर उपकरणों का प्रशिक्षण।

१०. आपातकालीन रिकॉर्ड: छात्र उपस्थिति पंजिका, अभिभावकों के संपर्क विवरण और त्वरित सूचना तंत्र की समीक्षा।

११. सीसीटीवी सर्विलांस: सुरक्षा कैमरों की उपलब्धता, कार्यशीलता और प्रवेश-निकास (Entry-Exit) नियंत्रण की जांच।

१२. महिला/छात्रा सुरक्षा: छात्राओं के लिए पृथक शौचालय, पर्याप्त लाइटिंग व्यवस्था और शिकायत निवारण तंत्र।

१३. दिव्यांग अनुकूलता: दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए सुगम व सुरक्षित निकासी मार्ग।

१४. फर्स्ट एड व चिकित्सा: प्राथमिक उपचार पेटी की उपलब्धता और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से आपातकालीन समन्वय।

१५. स्वच्छता व पेयजल: शुद्ध पीने का पानी, पर्याप्त साफ-सफाई और स्वास्थ्यकर शैक्षणिक वातावरण का परीक्षण।

१६. परिवहन सुरक्षा: स्कूल वाहनों और ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था में निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुपालन की जांच।

१७. एप्रोच रोड: आपातकालीन स्थिति में राहत एवं बचाव वाहनों (फायर टेंडर) की संस्थान तक निर्बाध पहुंच।

१८. तत्काल कार्रवाई: जनसुरक्षा के लिए तात्कालिक खतरा बनने वाली गंभीर अनियमितताओं पर तुरंत एक्शन की संस्तुति।

१९. विधिक कार्रवाई: मानकों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिनियमों के तहत कठोर दंडात्मक व प्रशासनिक कार्रवाई।

जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा कि निरीक्षण के दौरान पाई गई मामूली कमियों को सुधारने के लिए कड़े निर्देश जारी किए जाएंगे, जबकि गंभीर अनियमितताएं या जनसुरक्षा से खिलवाड़ पाए जाने पर नियमानुसार दंडात्मक और विधिक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। ४ जून २०२६ को जारी मूल आदेश की अन्य सभी शर्तें यथावत रहेंगी और यह नया आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।


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