हल्द्वानी आयुष्मान आरोग्य मंदिर के कर्मचारियों की शिकायत पर नगर आयुक्त को निर्देश देते कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत
Spread the love

हल्द्वानी आयुष्मान आरोग्य मंदिर में बड़ा विवाद: 3 महीने से नहीं मिला वेतन, सेन्टर भी बंद; कमिश्नर दीपक रावत ने दिए एक्शन के निर्देश! 👇

हल्द्वानी: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के सचिव और कुमाऊं आयुक्त (कमिश्नर) दीपक रावत ने हल्द्वानी स्थित ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन भुगतान से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले पर तत्काल कड़ा संज्ञान लिया है। चिकित्सा जैसी आवश्यक सेवाओं में लगे कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन न मिलने की शिकायत पर कमिश्नर ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने नगर आयुक्त हल्द्वानी को इस पूरे प्रकरण में त्वरित कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई करने और सभी प्रभावित कर्मचारियों का लंबित वेतन तत्काल प्रभाव से दिलाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

अप्रैल से जून तक का वेतन अटका, परिवारों के सामने गहराया आर्थिक संकट

‘वाइटल रेडियोलॉजी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ के बैनर तले आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सेवाएं दे रहे दर्जनों प्रभावित कर्मचारियों ने कुमाऊं आयुक्त को एक सामूहिक लिखित शिकायती पत्र सौंपा। कर्मचारियों ने बताया कि वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से मरीजों की तीमारदारी में जुटे हुए हैं, लेकिन आउटसोर्स कंपनी प्रबंधन द्वारा उन्हें अप्रैल, मई और जून 2026 का मासिक वेतन अब तक नहीं दिया गया है।

लगातार तीन महीने से जेब खाली होने के कारण कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित कर्मचारियों ने भावुक होते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों की स्कूल फीस, दैनिक राशन-खर्च, मकान का किराया और खुद की चिकित्सा जैसी बुनियादी व आवश्यक जरूरतों को पूरा करना भी नामुमकिन हो रहा है। इसके अतिरिक्त, कंपनी द्वारा बिना किसी ठोस कारण के कुसुमखेड़ा स्थित सेन्टर को भी अचानक बंद कर दिया गया है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

वेतन मांगने पर मानसिक उत्पीड़न और नौकरी से निकालने की धमकी

शिकायती पत्र में कर्मचारियों ने आउटसोर्स कंपनी के प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब भी वे नियमानुसार अपना जायज वेतन मांगते हैं, तो कंपनी प्रबंधन द्वारा उनका गंभीर मानसिक उत्पीड़न किया जाता है। उन्हें सीधे नौकरी से बाहर निकालने और भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां तक दी जा रही हैं। कर्मचारियों ने बताया कि इस विसंगति के संबंध में उन्होंने पहले भी प्रबंधन को कई बार मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया था, लेकिन कोई विधिक समाधान निकालने के बजाय उन्हें प्रताड़ित किया गया।

कुल 50 मेडिकल और पैरामेडिकल कर्मचारी हैं प्रभावित

शिकायत के अनुसार, इस गंभीर वेतन विसंगति की मार झेलने वाले प्रभावितों में चिकित्सा विभाग के विभिन्न संवर्गों के कुल 50 कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें:

  • 10 विशेषज्ञ चिकित्सक (Doctors)

  • 10 फार्मासिस्ट (Pharmacists)

  • 10 स्टाफ नर्स (Staff Nurses)

  • 10 एमपीडब्ल्यू कर्मचारी (MPW)

  • 10 पर्यावरण मित्र/सफाई कर्मचारी

 कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत का त्वरित और कड़ा एक्शन

मामले की संवेदनशीलता, स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता और मानव अधिकारों के हनन को देखते हुए कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने बिना किसी विलंभ के नगर आयुक्त को इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है। कमिश्नर ने कड़े निर्देश दिए हैं कि कंपनी के विधिक दायित्वों की समीक्षा की जाए और सभी प्रभावित डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ का रुका हुआ वेतन शीघ्रता से उनके खातों में ट्रांसफर करवाया जाए। साथ ही, उन्होंने आम जनता की सुविधा के लिए कुसुमखेड़ा स्थित बंद पड़े सेन्टर को भी तत्काल प्रभाव से दोबारा खुलवाने के आदेश जारी किए हैं।


Spread the love

You missed