Uttarakhand Administrative Concept Representing Chief Secretary Water Quality Review Meetingदेहरादून सचिवालय स्थित मुख्य सचिव कार्यालय का प्रतीकात्मक दृश्य।
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देवभूमि जन हुंकार, देहरादून / नैनीताल: नैनीताल जनपद के अंतर्गत आने वाले ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य संकट की घटना को लेकर उत्तराखंड सरकार ने बेहद कड़ा और सख्त रुख अपना लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और पूरे प्रकरण की परत-दर-परत समीक्षा की। मुख्य सचिव ने प्रशासनिक अमले की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए दो-टूक शब्दों में कहा कि जनस्वास्थ्य और पेयजल की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

 फील्ड कर्मचारियों के नेटवर्क से बनेगा मजबूत सूचना तंत्र

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निर्देश दिए कि प्रदेश में फील्ड स्तर पर तैनात भारी-भरकम प्रशासनिक अमले का उपयोग एक प्रभावी सूचना तंत्र विकसित करने के लिए किया जाए।

  • इसमें शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और ट्यूबवेल ऑपरेटर जैसे मैदानी कर्मचारियों के नेटवर्क को शामिल किया जाएगा।

  • इस तंत्र के माध्यम से राज्य के किसी भी कोने में पेयजल की गुणवत्ता खराब होने या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की जानकारी तुरंत उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई जा सकेगी, जिससे समय रहते त्वरित कार्रवाई की जा सके।

वाटर सप्लाई योजनाओं की होगी जियो मैपिंग और जीआईएस मैपिंग

भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए सरकार ने तकनीकी और बुनियादी सुधारों पर जोर दिया है। मुख्य सचिव ने प्रदेश की प्रमुख वाटर सप्लाई योजनाओं की जियो मैपिंग और जीआईएस (GIS) के जरिए मैपिंग कराने के निर्देश दिए हैं।

  • इसके तहत पानी के स्रोत से लेकर स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट और उपभोक्ता तक पहुंचने वाले पूरे नेटवर्क का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा।

  • अधिकारियों को अगले 15 दिनों के भीतर प्रमुख वाटर सप्लाई योजनाओं का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने को कहा गया है, जिसमें लीकेज, क्लोरीनेशन, स्टोरेज टैंक की सफाई और कॉलीफॉर्म समेत अन्य मानकों की जांच होगी।

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एसओपी का सख्ती से पालन और एसटीपी के सरप्राइज निरीक्षण

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पेयजल और सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाए और उसका मैदानी स्तर पर सख्ती से पालन कराया जाए।

  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) को एसटीपी (STP) और सरफेस वाटर के साथ-साथ प्रमुख शहरों में पेयजल की नियमित गुणवत्ता जांच करने के आदेश दिए गए हैं।

  • इसके साथ ही प्रदेश के सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के सरप्राइज निरीक्षण कराने को भी कहा गया है।

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स्वास्थ्य विभाग को तुरंत मेडिकल टीमें भेजने के निर्देश

जनस्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है। कहीं भी दूषित पेयजल या इससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्या सामने आने पर तत्काल मेडिकल टीमें भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ और सीएमएस स्तर की व्यवस्थाओं को सक्रिय रखते हुए डॉक्टरों की टीम तैयार रखने को कहा गया है, तथा अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में जरूरी स्वास्थ्य सर्विलांस कराने के आदेश दिए गए हैं।

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विभागाध्यक्षों पर भी गिरेगी गाज: मुख्य सचिव की कड़ी चेतावनी

बैठक के अंत में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी विभागीय अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की घटना सामने आने पर प्रथम दृष्टया लापरवाही मिलने पर सीधे विभागाध्यक्षों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में अब हर स्तर पर जवाबदेही तय होगी और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक सुस्ती को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

समीक्षा बैठक में सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, डॉ. वी. षणमुगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


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