जिला न्यायाधीश प्रशांत जोशी के निर्देशन में अग्नि सुरक्षा पर महा-अभियान, सिविल जज पारुल थपलियाल की मौजूदगी में सीखे आग बुझाने के गुर!
नैनीताल: माननीय उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा-निर्देशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जिला न्यायाधीश श्री प्रशांत जोशी के कुशल निर्देशन में जिला मुख्यालय सिविल कोर्ट परिसर में एक महत्वपूर्ण अग्नि सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सिविल जज (सी०डि०) व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती पारुल थपलियाल के नेतृत्व तथा अग्नि शमन पुलिस विभाग के विशेष सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पीएलवी (पैरलीगल वॉलिंटियर्स) और अधिकार मित्रों को आकस्मिक आग दुर्घटनाओं से निपटने के लिए व्यावहारिक रूप से सक्षम बनाना था.

इस विशेष सत्र के दौरान मल्लीताल के अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह नेगी ने सभी पीएलवी को वनों और आवासीय क्षेत्रों में आग लगने के मुख्य कारणों तथा उनसे बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जागरूक किया. उन्होंने बताया कि जंगलों में आग लगने की घटनाओं के मुख्य कारणों को मुख्य रूप से दो भागों—मानवीय और प्राकृतिक में बांटा जा सकता है. हैरान करने वाला तथ्य यह है कि जंगल में लगने वाली लगभग 90% आग के लिए स्वयं मनुष्य और उनकी विभिन्न लापरवाह गतिविधियां ही जिम्मेदार होती हैं. इसमें जलती हुई सिगरेट, बीड़ी या माचिस की तीली को जंगलों में फेंक देना, जंगल में कैंपिंग के दौरान जलाई गई आग को बिना बुझाए छोड़ देना, किसानों द्वारा फसल अवशेष या जंगल के पास कचरा जलाना जो हवा के साथ फैल जाता है, और ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ के फूल बीनने या नई घास उगाने के लिए जानबूझकर लगाई जाने वाली आग शामिल है. इसके विपरीत प्राकृतिक कारणों में तूफानी मौसम में आकाशीय बिजली का सीधे सूखे पेड़ों पर गिरना, तेज हवाओं के कारण सूखी बांस की टहनियों या पेड़ों का आपस में रगड़ खाना और गर्मी व सूखे के मौसम में वातावरण का अत्यधिक गर्म होना प्रमुख है.
अग्निशमन अधिकारी ने इस आपदा से निपटने के लिए सरकारी और सामुदायिक स्तर पर किए जाने वाले बचाव कार्यों की भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जंगलों के बीचों-बीच ‘फायर लाइन्स’ (खाली पट्टियां) बनाई जाती हैं, ताकि आग एक हिस्से से दूसरे हिस्से में न फैल सके, साथ ही वन विभाग द्वारा ड्रोन और सैटेलाइट के माध्यम से प्रभावी गश्त व निगरानी की जाती है ताकि शुरुआती स्तर पर ही आग का पता लगाया जा सके.
कार्यक्रम के सबसे महत्वपूर्ण चरण में सभी उपस्थित प्रतिभागियों को प्राथमिक अग्निशमन उपकरणों (Fire Extinguishers) के लाइव संचालन का व्यावहारिक डेमो प्रदान किया गया. इस दौरान आग को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए ‘PASS’ (PIN-PULL-AIM-SQUEEZE-SWEEP) तकनीक की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी गई, जिसके चार मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
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P – Pull (खींचें): सबसे पहले अग्निशामक यंत्र के ऊपरी हिस्से में लगी सेफ्टी पिन को बाहर खींचें, जो इसके सुरक्षा लॉक को तोड़ देता है.
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A – Aim (निशाना लगाएं): यंत्र के नोज़ल या पाइप का रुख सीधे आग की जड़ (आधार) की तरफ करें, न कि ऊपर उठती लपटों पर.
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S – Squeeze (दबाएं): इसके बाद यंत्र के हैंडल या लीवर को धीरे से दबाएं, जिससे आग बुझाने वाला रासायनिक पदार्थ बाहर निकल सके.
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S – Sweep (घुमाएं): अंत में नोज़ल को एक तरफ से दूसरी तरफ (बाएं से दाएं) घुमाते हुए आग पर समान रूप से स्प्रे करें, जब तक कि आग पूरी तरह से बुझ न जाए.
इस व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से पीएलवी और अधिकार मित्रों को किसी भी आकस्मिक आग दुर्घटना को शुरुआती स्तर पर ही प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के गुर सिखाए गए.





