पूर्व जिला मीडिया प्रभारी भाजपा भुवन भट्ट
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अंदरूनी घमासान: उत्तराखंड भाजपा में पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पर पूर्व मीडिया प्रभारी ने खोली पोल, पहाड़ों में अधिकारियों की मनमानी पर उठाए सवाल!

हल्द्वानी/उत्तराखंड: भारतीय जनता पार्टी से पिछले 35 वर्षों से निरंतर जुड़े वरिष्ठ नेता और पूर्व जिला मीडिया प्रभारी भुवन भट्ट ने राज्य में भाजपा के पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं की हो रही लगातार उपेक्षा पर गहरी चिंता और भारी दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में संगठन की वर्तमान कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन निष्ठावान कार्यकर्ताओं की खून-पसीने की मेहनत, अथक संघर्ष और त्याग के बूते आज पार्टी उत्तराखंड में लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत से सत्ता का सुख भोग रही है, आज उन्हीं मूल कार्यकर्ताओं को पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया गया है।

‘दरी बिछाने’ तक सीमित रह गए निष्ठावान कार्यकर्ता, दलबदलुओं को तरजीह:

पार्टी के भीतर पनप रहे गहरे असंतोष को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन के शीर्ष स्तर पर बाहर से आए दलबदलू और अवसरवादी नेताओं को पलकों पर बिठाया जा रहा है और उन्हें बड़े-बड़े पद व मलाईदार दायित्व सौंपे जा रहे हैं। इसके विपरीत, पार्टी की रीढ़ कहे जाने वाले पुराने और वफादार कार्यकर्ता आज केवल दरी बिछाने, विपक्षियों के पुतले फूंकने, पार्टी की बैठकों व रैलियों में भीड़ जुटाने और बड़े नेताओं के होर्डिंग्स-पोस्टर लगाने तक ही सीमित होकर रह गए हैं। समर्पित कार्यकर्ताओं के इस तरह हो रहे मानसिक उत्पीड़न से संगठन के भीतर अंदरूनी कलह और निराशा का माहौल पैदा हो रहा है।

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पहाड़ों में बेलगाम नौकरशाही और अधिकारियों की मनमानी चरम पर:

भुवन भट्ट ने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पर्वतीय इलाकों में हालात और भी ज्यादा बदतर और गंभीर हो चुके हैं। पहाड़ों में तैनात स्थानीय अधिकारी और सत्ता के गलियारों में रसूख रखने वाले करीबी लोग पूरी तरह से अपनी मनमानी पर उतारू हैं। बेलगाम हो चुकी नौकरशाही के चलते आम जनता और दिन-रात जनता के बीच रहने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं की कोई सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे धरातल पर सरकार के खिलाफ जन-आक्रोश और असंतोष तेजी से पैर पसार रहा है।

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पार्टी नेतृत्व से दो टूक मांग और दी कड़ी चेतावनी:

वरिष्ठ भाजपा नेता ने पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व के समक्ष अपनी आवाज बुलंद करते हुए दो प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. दल के प्रति वफादार, निष्ठावान और जमीन से जुड़े पुराने कार्यकर्ताओं को संगठन व सरकार में उनका वाजिब हक, उचित स्थान और सम्मानजनक जिम्मेदारी तत्काल सौंपी जाए।

  2. पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में बेलगाम अधिकारियों की मनमानी व तानाशाही पर तुरंत प्रभावी रोक लगाई जाए और जनता व कार्यकर्ताओं की जनसमस्याओं का समयबद्ध व त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने शीर्ष नेतृत्व को बेहद स्पष्ट और कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा नहीं की गई, तो जमीनी स्तर पर संगठन बुरी तरह से कमजोर हो जाएगा, जिसका सीधा और घातक असर आने वाले चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ना तय है।


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