देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी (नैनीताल): उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के अंतर्गत हल्द्वानी स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल (STH) में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन तूल पकड़ता जा रहा है। मासिक स्टाइपेंड में भारी वृद्धि की मांग को लेकर एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज तीसरे दिन भी लगातार जारी है, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाओं और शैक्षणिक सत्र पर भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
हड़ताल पर बैठे इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में मात्र 17,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है, जो मौजूदा महंगाई और उनके द्वारा किए जाने वाले कठिन कार्य के लिहाज से बहुत कम है। वे इस राशि को बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का तर्क है कि वे दिन-रात अस्पताल की इमरजेंसी और वार्डों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में उनके मानदेय में उचित बढ़ोतरी होनी चाहिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के प्राचार्य डॉ. अजय आर्य ने मीडिया के सामने आकर कॉलेज प्रशासन का पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटर्न डॉक्टरों की इस मांग को लेकर शासन को पहले ही पत्र भेजा जा चुका है और कॉलेज प्रशासन लगातार शासन के उच्च स्तर पर संपर्क बनाए हुए है।
प्राचार्य ने यह भी समझाया कि एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाली राशि किसी प्रकार का नियमित वेतन नहीं, बल्कि उनकी प्रशिक्षण अवधि का स्टाइपेंड है। इंटर्नशिप एमबीबीएस पाठ्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, और इसी अवधि के सफल प्रशिक्षण के बाद डॉक्टर आगे के मेडिकल काउंसिल पंजीकरण तथा अन्य पेशेवर प्रक्रियाओं के लिए पात्र बनते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी मांग लोकतांत्रिक तरीके से रखने का अधिकार है और उनकी बात सुनने में कॉलेज प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है।
हालांकि, प्राचार्य डॉ. अजय आर्य ने हड़ताल पर बैठे छात्रों को एक सख्त चेतावनी भी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हड़ताल के दौरान छात्रों की अनुपस्थिति (Absentees) दर्ज की जा रही है, क्योंकि इंटर्नशिप के दौरान निर्धारित प्रशिक्षण और करिकुलम गतिविधियों में नियमित उपस्थिति होना अनिवार्य है।
प्राचार्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्र लंबे समय तक हड़ताल के चलते अनुपस्थित रहते हैं, तो उनकी इंटर्नशिप अवधि प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा और गंभीर असर आगे नीट-पीजी (NEET-PG) की पात्रता पर भी पड़ सकता है, क्योंकि इसके लिए निर्धारित कटऑफ तिथि तक आवश्यक पंजीकरण और सभी प्रशिक्षण संबंधी शर्तें पूरी करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है।
डॉ. अजय आर्य ने दोहराया कि छात्रों की यह मांग पूरी तरह शासन के संज्ञान में है और कॉलेज स्तर से लगातार समन्वय किया जा रहा है। अब सभी की निगाहें शासन के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं, जबकि कॉलेज प्रशासन जल्द से जल्द इस गतिरोध के समाप्त होने की उम्मीद जता रहा है।
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