तमन्ना बनी ‘Neha’: हरिद्वार चंडीघाट पर हुआ बड़ा अनुष्ठान!
हरिद्वार (26 जुलाई 2026): धर्मनगरी हरिद्वार के प्रसिद्ध चंडीघाट तट पर रविवार को एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। यहाँ मुस्लिम युवती तमन्ना ने पूरे विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और गंगा स्नान के साथ सनातन धर्म स्वीकार कर लिया है। घर वापसी और धर्म परिवर्तन के इस वैदिक संस्कार के बाद तमन्ना का नया नाम ‘नेहा’ रखा गया है।
इस अवसर पर हरिद्वार के प्रमुख साधु-संत, महामंडलेश्वर, विभिन्न हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारी और सैकड़ों सनातन धर्मावलंबी साक्षी बने और नव-नामकरण वाली नेहा को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
तीर्थाचार्य और संतों के सानिध्य में संपन्न हुआ संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान
यह पूरा वैदिक धर्मांतरण एवं संस्कार कार्यक्रम तीर्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध तीर्थाचार्य संत राम विशाल दास महाराज के पावन मार्गदर्शन तथा पंडित जितेंद्र ज्योति के संरक्षण व पुरोहितत्व में विधि-विधान से संपन्न कराया गया।
चंडीघाट पर सबसे पहले युवती का गंगा जल से आचमन व पवित्र स्नान कराया गया, जिसके बाद यज्ञ-हवन, गोदान व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सनातन धर्म में शामिल करने की समस्त धार्मिक प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
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“पूर्वजों की परंपरा में वापसी का हर स्तर पर स्वागत” – बाबा हठयोगी
कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद के संरक्षक बाबा हठयोगी महाराज ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इतिहास के विभिन्न कालखंडों और विषम परिस्थितियों में अनेक लोगों को भय, अत्याचार या राजनीतिक दबाव के कारण अपने मूल धर्म से दूर होना पड़ा था।
उन्होंने कहा:
“आज के दौर में यदि कोई व्यक्ति बिना किसी दबाव के, अपनी स्वतंत्र इच्छा, अटूट आस्था और विवेक के आधार पर अपने पूर्वजों की मूल परंपरा और सनातन संस्कृति में लौटना चाहता है, तो संपूर्ण संत समाज और सनातन धर्म उसका सम्मानपूर्वक स्वागत करता है।”
कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद के संरक्षक बाबा हठयोगी महाराज, दिल्ली आर्य समाज के मुकेश शास्त्री, विश्व हिंदू परिषद के विभाग संगठन मंत्री अर्जुन जी, पानब देव आश्रम के महंत ओमदास महाराज और हिंदू रक्षा दल के जिलाध्यक्ष विशाल चौहान जैसी प्रमुख हस्तियां मुख्य रूप से शामिल रहीं। इनके अतिरिक्त विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि, अनेक समाज सेवी और सैकड़ों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। अनुष्ठान के अंत में उपस्थित सभी संतों ने नेहा (पूर्व नाम तमन्ना) के उज्ज्वल, सुरक्षित और सुखद भविष्य की कामना करते हुए उसे अपना स्नेहिल आशीर्वाद प्रदान किया।
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