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राज्य आंदोलनकारियों की बैठक में उठी सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी

प्राकृतिक आपदा, पलायन और बेरोजगारी पर चिंता जताई

नैनीताल जनपद के खुर्पाताल स्थित एक होटल में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता चिन्हित राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यान ने की, जबकि संचालन डॉ. सुरेश डालकोटी ने किया। इस अवसर पर राज्य आंदोलनकारी मंच के जिला अध्यक्ष गणेश सिंह बिष्ट ने कहा कि राज्यवासी आज प्राकृतिक आपदाओं, खेत-खलिहान के कटाव, भूस्खलन और पालतू पशुओं व संपत्ति के नुकसान से जूझ रहे हैं। अधिकारियों द्वारा नियमों का हवाला देकर मुआवजा सीमित रूप से दिया जा रहा है, जिससे लोगों का जीवन यापन कठिन होता जा रहा है।

गणेश बिष्ट ने कहा कि नैनीताल जनपद में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ चुकी है। योजनाएं पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हैं, जिसके चलते न तो जनता को लाभ मिल रहा है और न ही धन का सही उपयोग हो रहा है। उन्होंने पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि इन कारणों से गांव लगातार खाली हो रहे हैं और किसी स्तर पर जवाबदेही दिखाई नहीं देती।

सभा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि राजधानी, भू-कानून, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान चाहिए तो 2027 में क्षेत्रीय ताकतों को सत्ता के केंद्र में लाना होगा। वक्ताओं ने पर्यावरण के अनुकूल योजनाएं लागू करने और समयबद्ध विकास मॉडल अपनाने की बात कही।

सभा की अध्यक्षता कर रहे प्रभात ध्यान ने स्पष्ट कहा कि सरकार जिस तरह राज्य आंदोलनकारियों और जनता की समस्याओं की अनदेखी कर रही है, वह बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन उम्मीदों और बलिदानों के साथ उत्तराखंड राज्य बना था, उन्हें साकार करने के लिए निकट भविष्य में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती देवकी बिष्ट और खुर्पाताल ग्राम सभा की प्रधान श्रीमती हंसी नेगी को उनकी जीत पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारियों—भुवन जोशी, कमलेश चंद्र पांडे, हुकुम सिंह कुँवर, कुमार पान सिंह, मनमोहन कनवाल, डॉ. मनमोहन बिष्ट, मुकेश जोशी, शाकिर अली, जीवन सिंह नेगी, खड़क सिंह, पान सिंह रौतेला, पान सिंह नेगी, श्रीमती लीला बोरा, रईस भाई और महेश जोशी आदि ने अपने विचार रखे।

सभा के अंत में कर्मचारी नेता एवं आंदोलनकारी जी.सी. उप्रेती ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसी दौरान महेश जोशी ने गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की जागर गाकर सभा में जोश भर दिया, जिससे उपस्थित आंदोलनकारी उत्साह और संकल्प से ओतप्रोत हो उठे।


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