कामरेड राजा बहुगुणा के निधन पर गहरा दुःख, आंदोलनकारी बिरादरी में शोक की लहर**
**पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने व्यक्त किया शोक—
हल्द्वानी। उत्तराखंड क्रांति दल के जुझारू संघर्षशील नेता कामरेड राजा बहुगुणा (राजा भाई) के निधन की सूचना से पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राजा भाई का जाना व्यक्तिगत और सामाजिक—दोनों स्तरों पर अपूरणीय क्षति है।
डॉ. जंतवाल ने बताया कि बीमारी के बाद उनका इलाज अच्छी तरह चल रहा था और लगातार संवाद भी होता रहा, लेकिन बीच में उनके स्वास्थ्य में अचानक गिरावट आई। साथी विवेक (कामरेड राजेन्द्र प्रथौली) ने सूचना दी कि हालत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल पहुंचकर स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ, पर उम्मीद बनाए हुए थे कि वे ठीक होकर वापस लौटेंगे।
उन्होंने कहा कि राजा बहुगुणा छात्र जीवन से ही जन मुद्दों को लेकर मुखर रहे। नैनीताल डीएसबी कैंपस में छात्र रहते हुए उन्होंने आंदोलन की राह पकड़ ली थी। बन आंदोलन के दौरान हमारी पहली मुलाकात हुई और फिर अनेक आंदोलनों में साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे।
नशा विरोधी आंदोलन में तो हमें साथ ही हथकड़ी तक लगी—यह उनकी संघर्षशील पहचान का प्रमाण है।
डॉ. जंतवाल ने स्मरण किया कि राजा भाई कभी भी किसी मुद्दे पर भ्रम में नहीं रहे। उनकी सोच स्पष्ट, निष्कपट और जनहित से प्रेरित थी। अन्याय के खिलाफ उन्होंने ताउम्र संघर्ष किया। उनके भीतर का साहस, साफगोई और जनता के प्रति निष्ठा ने उन्हें समाज में एक ऊँचा मुकाम दिया।
उन्होंने कहा कि राजा भाई का निधन ‘‘जनता के सही संघर्षों को आगे बढ़ाने वाली धारा’’ के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। मेरे लिए यह व्यक्तिगत क्षति भी है— दशकों पुराना साथी बिछड़ गया।
उन्होंने परिजनों, मित्रों और साथी कार्यकर्ताओं के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से राजा भाई को विनम्र श्रद्धांजलि।
अलविदा राजा भाई, आपकी स्मृतियाँ और संघर्ष की प्रेरणा सदैव हमारे साथ रहेंगी।
