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Fri. Oct 9th, 2026
मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा
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“गणतंत्र दिवस पर बगावत! बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा, बोले– अब देश में जनतंत्र नहीं, ‘भ्रमतंत्र’ चल रहा है”

📰 बरेली से बड़ी खबर

गणतंत्र दिवस के दिन, जब पूरा देश संविधान और लोकतंत्र के उत्सव में डूबा था, उसी दिन उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक ऐसा धमाका हुआ जिसने सत्ता और सिस्टम दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया। बरेली में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर प्रदेश की नौकरशाही में हड़कंप मचा दिया।

यह इस्तीफा केवल एक पद छोड़ने का फैसला नहीं था, बल्कि मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ एक खुला विद्रोह था।

🕉️ शंकराचार्य प्रकरण बना चिंगारी

अलंकार अग्निहोत्री का यह असाधारण कदम प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना के विरोध में सामने आया है। उन्होंने इसे न केवल धर्मगुरुओं के अपमान का मामला बताया, बल्कि इसे संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला करार दिया।

📜 7 पन्नों का इस्तीफा, सरकार पर तीखा हमला

राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे गए सात पन्नों के इस्तीफे में अलंकार अग्निहोत्री ने शब्दों की मर्यादा तोड़ी नहीं, लेकिन सच्चाई की तलवार पूरी धार से चलाई।

इस्तीफे के अंतिम पन्ने में उन्होंने लिखा—

“अब देश में न जनतंत्र बचा है, न गणतंत्र। व्यवस्था ‘भ्रमतंत्र’ में तब्दील हो चुकी है।”

इतना ही नहीं, उन्होंने यहां तक कह दिया कि—

“देश में अब देशी सरकार नहीं, बल्कि विदेशी जनता पार्टी की सरकार चल रही है।”

इन शब्दों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया है।

🎓 UGC बिल पर भी खुला विरोध

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में यूजीसी बिल को लेकर भी कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था, अकादमिक स्वतंत्रता और बौद्धिक स्वायत्तता के लिए घातक बताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।

🏛️ नौकरशाही में खलबली, सियासत गरम

एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह खुलेआम सरकार और सिस्टम के खिलाफ खड़ा होना कोई मामूली घटना नहीं है। नौकरशाही से लेकर सियासी गलियारों तक, हर जगह इस इस्तीफे के मायनों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।


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