एकता विहार धरना स्थल पर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर हवन और प्रदर्शन करते आंदोलनकारी
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गैरसैंण आंदोलन के 100 दिन पूरे: आंदोलनकारियों ने किया बुद्धि-शुद्धि हवन, नेताओं के मुखौटे पहनकर कसा तंज

गैरसैंण: उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर ‘स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति’ के बैनर तले चल रहा क्रमिक अनशन आज एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलनकारियों के इस संघर्ष ने आज अपने निरंतर १०० दिन पूरे कर लिए हैं। इस विशेष अवसर पर आंदोलनकारियों ने सरकार की कार्यप्रणाली और कथित असंवेदनशीलता पर तीखा प्रहार करने के लिए धरना स्थल पर ही एक विशेष यज्ञ-हवन का आयोजन किया, जिसमें देश और प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व की सद्बुद्धि जागृत करने के लिए आहुतियाँ दी गईं। इसके साथ ही आंदोलनकारियों ने सरकार के रवैये को “भैंस के आगे बीन बजाने” जैसा बताते हुए एक बेहद अनोखा और नाटकीय प्रदर्शन किया, जिसने पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

१००वें दिन के इस विरोध प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने सत्ता के दोहरे चरित्र को उजागर करने के लिए एक विशेष राजनीतिक नाटक का मंचन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज सहित विभिन्न विधायकों के मुखौटे लगाकर नेताओं के विरोधाभासी बयानों पर करारा तंज कसा। आंदोलनकारियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सूबे के राजनेता सार्वजनिक मंचों से तो “जय पहाड़” का नारा बुलंद करते हैं, लेकिन जब धरातल पर पहाड़ के अधिकारों की बात आती है, तो वे स्वयं दिल्ली और देहरादून के वातानुकूलित दफ्तरों एवं सुख-सुविधाओं में सिमट कर रह जाते हैं। आंदोलनकारियों का साफ तौर पर आरोप था कि सत्ता प्रतिष्ठान पहाड़ की जनता के आंसुओं और पिछले १०० दिनों से चल रहे इस शांतिपूर्ण अनशन के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन हो चुका है।

इस निर्णायक मौके पर डी.ए.वी. (DAV) छात्रसंघ के पूर्व महासचिव सचिन थपलियाल ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पृथक राज्य गठन के इतने वर्षों बाद भी गैरसैंण को उसका वास्तविक अधिकार न मिलना वर्तमान राजनेताओं की राजनीतिक इच्छाशक्ति की घोर कमी को दर्शाता है। वहीं, समिति के संरक्षक और पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया कि जब तक गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी का पूर्ण दर्जा हासिल नहीं हो जाता, तब तक यह जन-आंदोलन किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार ने अपना दमनकारी रवैया नहीं बदला, तो आंदोलनकारी ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए पूरी तरह बाध्य होंगे।

इस ऐतिहासिक १००वें दिन के अनशन और प्रदर्शन में मुख्य रूप से अनशनकारी सचिन थपलियाल, गोपाल दत्त कुमेड़ी, ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, पार्थ रतूड़ी, मनमोहन शर्मा, शैलेंद्र शेखर करगेती, कुलदीप अग्रवाल, रामेश्वर शर्मा, दौलत राम शाह, सत्य प्रकाश कोठियाल, संतोष राणा और भास्कर रावत सहित प्रदेश के कोने-कोने से पहुंची भारी संख्या में मातृशक्ति, नौजवान और वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक सुर में गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का संकल्प दोहराया।


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