महाराजगंज में नीट परीक्षा के तनाव में छात्रा की आत्महत्या
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NEET री-एग्जाम के तनाव में 19 साल की होनहार छात्रा ने की खुदकुशी, प्रश्न पुस्तिका पर लिखा दर्दनाक संदेश

महाराजगंज: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ नीट (NEET) की तैयारी कर रही १९ वर्षीय एक होनहार छात्रा ने मानसिक तनाव के चलते कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में आयोजित हुई मेडिकल प्रवेश परीक्षा देने के बाद से ही छात्रा अत्यधिक मानसिक दबाव और तनाव में थी। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

प्राप्त विवरण के मुताबिक, मृतका चौपरिया कंचनपुरा गांव की रहने वाली थी। परिजनों ने बताया कि रविवार, २१ जून को आयोजित हुई नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की दोबारा परीक्षा (Re-exam) देने के बाद से वह काफी परेशान और गुमसुम रहने लगी थी। कोतवाली के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) निर्भय सिंह ने बताया कि घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान पुलिस को मृतका के कमरे से नीट की एक प्रश्न पुस्तिका (Question Booklet) बरामद हुई है। इस पुस्तिका पर हाथ से एक बेहद भावुक और दर्दनाक संदेश लिखा हुआ था: “मैं कुछ नहीं कर सकती, मेरे भाई।” पुलिस ने इस संदिग्ध सुसाइड नोट और प्रश्न पुस्तिका को अपने कब्जे में ले लिया है, जिसकी फोरेंसिक व हैंडराइटिंग जांच कराई जा रही है।

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घटना के वक्त परिवार के अन्य सदस्य अपने रोजमर्रा के घरेलू कार्यों में व्यस्त थे। इसी बीच जब परिजन कमरे में पहुंचे तो छात्रा वहाँ अचेत और बेहोश अवस्था में मिली। आनन-फानन में परिजन उसे तुरंत जिला अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

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SHO निर्भय सिंह ने बताया कि मामले के सभी कानूनी और विधिक पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। परिजनों के अनुसार, मृतका के पिता पेशे से एक दर्जी हैं, जिन्होंने गंभीर आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों की उच्च शिक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। वह पढ़ाई में बेहद होनहार थी और पूरे परिवार को उसके डॉक्टर बनने की बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन परीक्षा के दबाव ने एक हंसते-खेलते परिवार का सपना तोड़ दिया। इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान छात्रों पर बढ़ने वाले अत्यधिक मानसिक दबाव और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सामाजिक सवाल खड़े कर दिए हैं।


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