राजकीय महाविद्यालय में अखिल भारतीय शिक्षा समागम के तहत NEP-2020, विकसित भारत @2047 व लैंगिक संवेदनशीलता पर विशेष व्याख्यान व सेमिनार संपन्न।

संवाददाता सीमा खेतवाल
देवभूमि जन हुंकार, (04 अगस्त 2026): राजकीय महाविद्यालय में आज अखिल भारतीय शिक्षा समागम (ABSS) के बैनर तले एक दिवसीय विशेष व्याख्यान एवं जागरूकता सेमिनार का गरिमामयी माहौल में सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान “राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के संदर्भ में विकसित भारत @2047” तथा “लैंगिक संवेदनशीलता (Gender Sensitization)” जैसे दो अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर विद्वानों व विशेषज्ञों ने अपने बहुमूल्य विचार साझा किए।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ विधिवत शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों एवं महाविद्यालय परिवार द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। मंच पर मुख्य अतिथि श्री हीरा सिंह कर्म्याल (सदस्य, उत्तराखंड संस्कृत साहित्य एवं कला परिषद), महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जयचन्द्र कुमार गौतम, तथा दोनों कार्यक्रमों की नोडल अधिकारी डॉ. अलका शर्मा एवं डॉ. नीलम सौन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. अलका शर्मा ने सभी मंचासीन अतिथियों का पुष्पगुच्छ व स्वागत वचनों से आत्मीय अभिनंदन किया और आज के व्याख्यानमाला की विषय-वस्तु पर संक्षिप्त प्रकाश डाला।
NEP-2020 भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी: डॉ. नागेंद्र पाल
प्रथम सत्र में “NEP-2020 के संदर्भ में विकसित भारत @2047” विषय पर मुख्य वक्ता डॉ. नागेंद्र पाल ने अपना विस्तृत संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 मात्र एक शैक्षणिक रूपरेखा नहीं है, बल्कि यह भारत को वर्ष 2047 तक एक ज्ञान-आधारित और आत्मनिर्भर महाशक्ति बनाने की दिशा में ले जाने वाली परिवर्तनकारी नीति है।
इसी क्रम में मुख्य अतिथि श्री हीरा सिंह कर्म्याल ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत, कौशल विकास (Skill Development), उद्योग तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों पर ज्ञानवर्धक विचार प्रस्तुत किए और छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करने की प्रेरणा दी।
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बिना भेदभाव के समान अवसर और सुरक्षा से ही सम्भव है सकारात्मक बदलाव: अंजू पांडे
द्वितीय सत्र में “लैंगिक संवेदनशीलता” विषय पर आयोजित जागरूकता सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में सखी वन स्टॉप सेंटर की अधिवक्ता श्रीमती अंजू पांडे उपस्थित रहीं। उन्होंने समाज में लैंगिक संवेदनशीलता की अवधारणा, इसके सामाजिक महत्व, समान अवसर, महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों तथा शैक्षणिक संस्थानों व कार्यस्थलों पर लैंगिक सम्मान और यौन उत्पीड़न (POSH Act) की रोकथाम संबंधी प्रावधानों पर विस्तार से व्याख्या की।
अधिवक्ता अंजू पांडे ने बल देकर कहा:
“समाज में सकारात्मक और स्थाई परिवर्तन तभी सम्भव है, जब प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी लैंगिक भेदभाव के समान अवसर, सम्मान और सुरक्षित माहौल प्राप्त हो।”
छात्रों का उत्साह और धन्यवाद ज्ञापन
आयोजित कार्यक्रमों के दौरान महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने जिज्ञासा और उत्साह के साथ सहभागिता की। कार्यक्रम के समापन अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जयचन्द्र कुमार गौतम ने मुख्य वक्ताओं, अतिथियों, आयोजकों और सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संचालन नोडल अधिकारी डॉ. अलका शर्मा एवं डॉ. नीलम सौन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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