Nainital District Magistrate Lalit Mohan Rayal Order Copy on Uttarakhand Bhoo Kanoonसख्त भू-कानून के तहत नैनीताल में 304 नाली भूमि राज्य सरकार में निहित करने के आदेश।
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देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी/नैनीताल (08 अगस्त 2026): उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए सख्त भू-कानून (Land Law) का असर अब धरातल पर कड़ाई से दिखाई देने लगा है। नैनीताल जिले में भू-कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जिले में विभिन्न प्रकार से भू-कानून के उल्लंघन से जुड़े 14 मामलों में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कुल 6.088 हेक्टेयर (लगभग 304 नाली) भूमि को राज्य सरकार में निहित (ज़ब्त) करने के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

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सुनवाई में खुले फर्जीवाड़े के परते: इन 4 तरीकों से हुआ था भू-कानून का उल्लंघन

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल द्वारा की गई विस्तृत अदालती सुनवाई और प्रशासनिक जांच के दौरान जिले में भू-कानून के उल्लंघन के कई चौंकाने वाले मामले सामने आए:

  1. बागवानी के नाम पर छल: जांच में ऐसे मामले पकड़े गए जिनमें बागवानी (Horticulture) के उद्देश्य से शासन से अनुमति लेकर भूमि क्रय की गई थी, लेकिन तय प्रयोजन के बजाय उस पर अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

  2. एक ही परिवार द्वारा सीमा से अधिक खरीद: कई मामलों में चालाकी दिखाते हुए एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर नियमों को दरकिनार कर निर्धारित वैधानिक सीमा से अधिक भूमि का क्रय किया गया था।

  3. कृषि भूमि का व्यावसायिक उपयोग: कृषि प्रयोजन (Agricultural Purpose) के लिए आवंटित भूमि पर बिना अनुमति के रिसॉर्ट, होटल और व्यावसायिक गतिविधियां (Commercial Activities) संचालित होती पाई गईं।

  4. अनुसूचित जाति (SC) भूमि का अवैध अंतरण: इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के व्यक्तियों की आरक्षित भूमि का नियमों के विपरीत सामान्य वर्ग के व्यक्तियों को विक्रय करने तथा केवल आवासीय स्वीकृति वाली ज़मीन का व्यावसायिक उपयोग करने के मामले उजागर हुए।

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ज़ब्त भूमि का उपयोग सार्वजनिक व जनहित कार्यों में होगा

प्रशासनिक आदेशों के तहत इन सभी 14 मामलों में भू-कानून का स्पष्ट उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित समस्त 304 नाली भूमि को राज्य सरकार के अधीन दर्ज कर लिया गया है। प्रशासन के अनुसार, भविष्य में इस ज़मीन का उपयोग जनहित, सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए किया जाएगा।

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जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने सख्त लहजे में कहा कि राज्य सरकार की मंशा उत्तराखंड में भूमि के क्रय-विक्रय को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत बनाना है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में भी भू-कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति, संस्था या भू-माफिया के विरुद्ध नियमानुसार इसी तरह की कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


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