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देवभूमि जन हुंकार, पिथौरागढ़ / धारचूला: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से व्यापार जगत के लिए एक बहुत ही बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आ रही है। भारत-चीन पारंपरिक सीमा व्यापार में बना आ रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है, जिसके बाद सीमांत क्षेत्रों में एक बार फिर से कारोबार की रौनक लौट आई है। पिथौरागढ़ से नौ व्यापारी और आठ सहायक (कुल 17 लोगों का दल) अपने व्यापारिक सामान के साथ तिब्बत की तकलाकोट मंडी के लिए रवाना हो चुके हैं।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत-चीन सीमा व्यापार में कुछ समय से गतिरोध बना हुआ था, जिसके टूटने के बाद अब व्यापारियों की सीमा पार आवाजाही ने तेजी पकड़ ली है। चीन की ओर से  सकारात्मक संदेश और हरी झंडी मिलने के बाद भारतीय व्यापारियों का तिब्बत जाने का सिलसिला एक बार फिर से सुचारू रूप से शुरू हो गया है।

इसी क्रम में, पहले से ही सीमांत मंडी गुंजी में अपनी बारी का इंतजार कर रहे नौ व्यापारी और उनके आठ सहायक (कुल 17 लोग) अपने जरूरी व्यापारिक सामान के साथ तिब्बत के लिए आगे बढ़े हैं और तकलाकोट मंडी पहुंच रहे हैं।

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व्यापार में आए इस सुचारू बदलाव और मार्ग खुलने से सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों और उनके परिवारों ने बहुत बड़ी राहत की सांस ली है। पिछले कुछ समय से व्यापार ठप होने के कारण कारोबारियों में चिंता का माहौल था, लेकिन अब इस बहाली से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया संबल मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, जमीनी स्थिति को लेकर यह जानकारी भी सामने आई है कि दूसरे दल के व्यापारी अभी अपने साथ बहुत अधिक मात्रा में सामान लेकर तिब्बत नहीं गए हैं, बल्कि वे स्थिति का आकलन कर रहे हैं। इसके साथ ही, पहले दल में तकलाकोट गए व्यापारियों में से एक प्रमुख व्यापारी शंकर सिंह गुंजयाल अपना अतिरिक्त सामान ले जाने के लिए विशेष रूप से वापस भारत आए हैं।

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सीमांत प्रशासन और व्यापार संघ इस पारंपरिक व्यापार को पूरी पारदर्शिता और सुचारूता के साथ आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक व्यापार के पटरी पर लौटने से क्षेत्र के युवाओं और व्यापारियों में नया जोश देखने को मिल रहा है।


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