2 साल पहले मृत कर्मचारी का लगातार दूसरी बार ट्रांसफर
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PWD का गजब कारनामा: 2 साल पहले दुनिया छोड़ चुके कर्मचारी का लगातार दूसरी बार कर दिया तबादला; थराली से रुद्रपुर ट्रांसफर देख हर कोई हैरान! 👇

देहरादून/थराली: उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग (PWD) में एक ऐसा हैरान कर देने वाला और गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और डिजिटल डेटा प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। विभाग ने अपनी हालिया तबादला सूची में एक ऐसे कनिष्ठ सहायक (Junior Assistant) का नाम शामिल कर उसका स्थानांतरण कर दिया है, जिनका करीब दो वर्ष पूर्व ही देहांत हो चुका है। विभाग की इस घोर लापरवाही के सामने आने के बाद से मुख्यालय से लेकर शासन स्तर तक हड़कंप मचा हुआ है और लोनिवि की गंभीर कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं।

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2024 में हो चुका है निधन, पत्नी को मिल चुकी है मृतक आश्रित कोटे से नौकरी

जानकारी के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग द्वारा बीते 1 जुलाई को प्रांतीय और निर्माण खंडों की वार्षिक स्थानांतरण सूची जारी की गई थी।

  • अजब-गजब ट्रांसफर: इस आधिकारिक सूची में कनिष्ठ सहायक सुरेंद्र सिंह का नाम शामिल करते हुए उनका स्थानांतरण निर्माण खंड, थराली से प्रांतीय खंड, रुद्रपुर दर्शाया गया है।

  • कड़वा सच: चौंकाने वाली बात यह है कि सुरेंद्र सिंह का 28 अप्रैल 2024 को ही आकस्मिक निधन हो चुका है। सुरेंद्र सिंह के निधन के पश्चात विभाग की ओर से उनकी पत्नी को निर्माण खंड, गैरसैंण में मृतक आश्रित के रूप में विधिक नियुक्ति भी प्रदान की जा चुकी है और वे वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

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 तीन बार लिखित सूचना देने के बाद भी सोता रहा विभागाध्यक्ष कार्यालय

सुरेंद्र सिंह के शोकाकुल परिजनों ने बताया कि उनके निधन की आधिकारिक और लिखित सूचना एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे तीन बार विभागाध्यक्ष कार्यालय (HQ) को डाक व लिखित माध्यम से भेजी गई थी। इसके बावजूद विभाग के स्थापना अनुभाग ने अपने सेवा रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा को अपडेट करने की जहमत नहीं उठाई।

विभाग की यह लापरवाही केवल इसी वर्ष तक सीमित नहीं है:

  • साल 2025 में भी हुआ था तबादला: पिछले वर्ष (2025) की स्थानांतरण सूची में भी दिवंगत सुरेंद्र सिंह का नाम शामिल कर दिया गया था, तब उनका ट्रांसफर थराली से हल्द्वानी दिखाया गया था।

  • लापरवाही की पराकाष्ठा: लगातार दूसरे वर्ष भी एक दिवंगत कर्मचारी का नाम सक्रिय सूची में डालकर ट्रांसफर ऑर्डर जारी करना यह साफ दर्शाता है कि विभाग में सुगम-दुर्गम और अनिवार्य तबादला सूचियां बिना किसी धरातलीय जांच और बिना सर्विस रिकॉर्ड देखे, केवल ‘कट-कॉपी-पेस्ट’ के सहारे आंखें बंद करके तैयार की जा रही हैं।

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उठ रहे गंभीर सवाल, कर्मचारियों में आक्रोश

इस प्रकरण के सोशल मीडिया और मीडिया में आने के बाद लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारी बैकफुट पर हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह मामला सीधे तौर पर घोर लापरवाही और सरकारी दायित्वों के प्रति उदासीनता का उदाहरण है। जब एक मृत कर्मचारी का डेटा विभाग दो साल में अपडेट नहीं कर पाया, तो जीवित कर्मचारियों की समस्याओं और उनके सेवा रिकॉर्ड का रख-रखाव किस प्रकार हो रहा होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। मामले में अब शासन स्तर से दोषी अधिकारियों और बाबुओं के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग उठ रही है।

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