हल्द्वानी कैम्प कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग और जिला सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक लेते जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल
Spread the love

हल्द्वानी में DM ललित मोहन रयाल का महा-एक्शन: अवैध लिंग परीक्षण बताने वाले को 50,000 का इनाम, डेंगू पर लापरवाही की तो खैर नहीं! 👇

हल्द्वानी (नैनीताल): जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने, अवैध लिंग परीक्षण पर पूर्ण अंकुश लगाने और मानसून काल में डेंगू के विधिक नियंत्रण को लेकर जिला प्रशासन बेहद सख्त हो गया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में कैम्प कार्यालय हल्द्वानी में जिला सलाहकार समिति और स्वास्थ्य महकमे के उच्चाधिकारियों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला सलाहकार समिति की बैठक जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में कैम्प कार्यालय हल्द्वानी में आयोजित की गई।

बैठक में पीसी-पीएनडीटी (PC-PNDT) एक्ट और क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के सख्त अनुपालन के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विधिक नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी संस्थान या अधिकारी के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति के तहत तत्काल दंडात्मक विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

यह भी पढ़ें 👉 🚨 पिथौरागढ़ : 5 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाला ‘सीरियल रेपिस्ट’ होशियार सिंह गिरफ्तार, हरिद्वार जेल से छूटते ही दोबारा किया खौफनाक कांड, जानिए पूरा मामला… 👇

भ्रूण लिंग परीक्षण पर पूर्ण प्रतिबंध: सूचना देने वाले को ₹50,000 का विधिक इनाम!

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. रश्मि पंत को जनपद के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की कड़ी और नियमित विधिक निगरानी सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

  • संदिग्ध केंद्रों पर तत्काल छापेमारी: जिलाधिकारी ने कड़े लहजे में कहा कि जनपद में एक भी सेंटर पर भ्रूण लिंग परीक्षण की विधिक शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। यदि किसी भी केंद्र पर संदिग्ध गतिविधि पाई जाती है, तो वहां तत्काल छापेमारी (Raid) कर मशीन को सील किया जाए । उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिये कि भ्रूण लिंग परीक्षण से सम्बन्धित सूचना एवं किसी भी संदिग्ध अल्ट्रासाउण्ड सेन्टर पर तत्परता से की जाये छापेमारी की कार्यवाही।]।

  • पहचान रहेगी गुप्त: बिना पंजीकरण और अवैध रूप से सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग करने वालों की सटीक विधिक सूचना देने वाले नागरिक को ₹50,000 का नकद इनाम दिया जाएगा और सूचनादाता का नाम पूरी तरह गोपनीय (Secret) रखा जाएगा। उन्होंने कहा जनपद में बिना पंजीकरण के मशीन का उपयोग करने वालों की सूचना देने पर रूपये 50,000 का इनाम दिया जाएगा और सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह से गुप्त रखा जाएगा।

  • रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी मशीन का संचालन करने वाले सभी रेडियोलॉजिस्ट और सोनोलॉजिस्ट के लिए एक्ट के तहत विधिक पंजीकरण अनिवार्य है। बिना वैध विधिक रजिस्ट्रेशन के मशीनों का प्रयोग संगीन कानूनन अपराध माना जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी मशीन का इस्तेमाल करने वाले सभी रेडियोलॉजिस्ट और सोनोलॉजिस्ट के लिए एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, बिना वैध रजिस्ट्रेशन के अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग करना कानूनन अपराध है।

यह भी पढ़ें 👉 🚨चंपत राय का पूर्व ड्राइवर निकला ₹50 करोड़ का आसामी; बंद कमरे में रात भर चली पूछताछ, 8 गिरफ्तार, जानिए कौन है ये ‘टिन्नू’… 

मानसून में डेंगू की रोकथाम पर हाई-लेवल विधिक समीक्षा

इसके उपरांत, मानसून काल के दौरान जनपद में डेंगू जनित रोगों की रोकथाम और प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य, नगर विकास और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तृत रणनीति तैयार की

मानसून काल में जनपद में डेंगू की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्वास्थ्य, नगर विकास सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।]।

  • फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव: समस्त नगर निकायों एवं पंचायती राज विभाग को नालियों की नियमित सफाई, जलभराव (Water Logging) का त्वरित विधिक समाधान करने और प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर फॉगिंग व एंटी-लार्वा छिड़काव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं । जनपद के समस्त नगर निकायों एवं पंचायतीराज विभाग को नालियों की नियमित सफाई, जलभराव की समस्या का त्वरित समाधान तथा फॉगिंग एवं एंटी लार्वा छिड़काव अभियान के निर्देश दिए गए।

  • इमरजेंसी सर्विलांस: स्वास्थ्य विभाग को अति-संवेदनशील और पूर्व में प्रभावित रहे क्षेत्रों में नियमित विधिक सर्विलांस, समय पर रक्त जांच (Dengue Test) और निशुल्क उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। बैठक में जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि संवेदनशील प्रभावित क्षेत्रों में नियमित सर्विलांस, समय पर जांच एवं उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

  • जनता से अपील: जिलाधिकारी ने आम जनमानस से भी अपील की है कि वे घरों के आसपास, कूलर, गमलों और टायरों में पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और बुखार आने पर स्वयं विधिक रूप से दवा (Self-Medication) लेने के बजाय निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर विधिक जांच कराएं। उन्होंने जनपद वासियों से अपील की, कि पूर्ण बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी एवं मच्छररोधी उपायों का प्रयोग करें तथा बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।

यह भी पढ़ें 👉उत्तराखंड में तबादला एक्ट की अंतिम समय-सीमा खत्म! 1124 से अधिक अफसरों-कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र बदले, शिक्षकों के ट्रांसफर अटके!

क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट होगा सख्ती से लागू, मरीजों का बनेगा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड

बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद में संचालित समस्त सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों (Private & Govt Hospitals) में क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों का शत-प्रतिशत अनुपालन कराने के कड़े विधिक निर्देश दिए। जनपद संचालित सभी सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों में क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों का शतप्रतिशत अनुपालन कराने के निर्देश दिये।

  • मेडिकल रिकॉर्ड्स रखना अनिवार्य: मुख्य चिकित्साधिकारी ने विधिक प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि इस एक्ट के तहत अस्पताल आने वाले प्रत्येक मरीज का इलेक्ट्रॉनिक और मेडिकल हेल्थ रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि एक्ट के अनुसार अस्पताल आने वाले हर मरीज का इलेक्ट्रॉनिक और मेडिकल हेल्थ रिकॉर्ड सरकारी एवं निजी अस्पताल प्रशासन के पास सुरक्षित होना चाहिए।]। यह नियम मैटरनिटी होम्स, डिस्पेंसरी क्लिनिक्स, नर्सिंग होम्स, एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक सभी विधिक चिकित्सा पद्धतियों पर समान रूप से लागू होता है। इस एक्ट के मेटरनिटी होम्स, डिस्पेंसरी क्लिनिक्स, नर्सिंग होम्स, एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर समान रूप से लागू होता है।

  • इमरजेंसी केयर अनिवार्य: एक्ट के तहत किसी भी आपातकालीन (Emergency) स्थिति में मरीज के अस्पताल पहुंचने पर उसे तुरंत प्राथमिक विधिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना प्रत्येक चिकित्सा संस्थान का मुख्य विधिक कर्तव्य है।  इस एक्ट के तहत प्रत्येक स्वास्थ्य सुविधा देने वाले संस्थानों का यह कर्तव्य है कि किसी रोगी के इमरजेंसी में पहुंचने पर उसको तुरंत स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाएं, जिससे रोगी को स्थिर किया जा सके।

 बैठक में मौजूद रहे प्रशासनिक व स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारी

कैम्प कार्यालय हल्द्वानी में आयोजित इस विधिक बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मंजूनाथ टीसी, मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. रश्मि पंत, बाल विकास अधिकारी अनुलेखा बिष्ट, डॉ. मनोज काण्डपाल, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. जयप्रकाश कश्यप, सीएमएस डॉ. ऊषा जंगपांगी, डॉ. दीपक जोशी, डॉ. दीपा आर्या, डॉ. हरीश चन्द्र पाण्डे, डॉ. एस गुप्ता, डॉ. यातिन मल्होत्रा, डॉ. प्रदीप सहित विभिन्न विधिक एवं रेखीय विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।  बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी, मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 रश्मि पंत, बाल विकास अधिकारी अनुलेखा बिष्ट,डा0 मनोज काण्डपाल,जिला मलेरिया अधिकारी डा0 जयप्रकाश कश्यप,सीएमएस डा0 ऊषा जंगपांगी,डा0 दीपक जोशी,डा0 दीपा आर्या,डा0 हरीश चन्द्र पाण्डे,डा0 एस गुप्ता,डा0 यातिन मल्होत्रा,डा0 प्रदीप के साथ ही आदि विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

👉देवभूमि जन हुंकार व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ को लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सब्स्क्राइब करें


Spread the love

You missed