कुमाऊं के 7 शहरों को मिलेगी जलभराव से मुक्ति, ₹448 करोड़ का ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार
हल्द्वानी (27 अप्रैल 2026): उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में मानसून और भारी बारिश के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या का अब स्थायी समाधान होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने मंडल के 7 प्रमुख शहरों के लिए तैयार ‘मास्टर ड्रेनेज प्लान’ को मंजूरी दे दी है। सोमवार को हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद इन प्रस्तावों को अंतिम स्वीकृति के लिए शासन को भेज दिया गया है।
कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने सिंचाई विभाग के इंजीनियरों को निर्देश दिए कि नालों का निर्माण पूरी तरह साइंटिफिक (वैज्ञानिक) तरीके से किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नालों की गहराई, चौड़ाई और ढाल (Slope) का विशेष ध्यान रखा जाए ताकि सिल्ट या कूड़े की वजह से ड्रेनेज सिस्टम जाम न हो। ड्रेनेज प्लान में पहाड़ी और मैदानी, दोनों क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है।
इन शहरों के लिए स्वीकृत हुआ बजट और प्लान:
बैठक में सिंचाई विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों के अनुसार, निम्नलिखित शहरों में ड्रेनेज सिस्टम का जाल बिछाया जाएगा:
| शहर | नालों की कुल लंबाई | प्रस्तावित लागत |
| बागेश्वर | 35.32 किमी | ₹129.50 करोड़ |
| टनकपुर | 31.32 किमी | ₹101.57 करोड़ |
| पिथौरागढ़ | 16.77 किमी | ₹87.85 करोड़ |
| बनबसा | 25.60 किमी | ₹66.57 करोड़ |
| कपकोट | 10.14 किमी | ₹37.28 करोड़ |
| गरुड़ | 8.28 किमी | ₹25.54 करोड़ |
(नोट: हल्द्वानी के लिए भी ड्रेनेज कनेक्टिविटी के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई है।)
अधिशासी अभियंताओं ने प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि इस मास्टर प्लान के लागू होने से शहरों के संवेदनशील क्रिटिकल प्वाइंट्स पर जलभराव खत्म होगा। नालों की 100% कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। अनियंत्रित जल बहाव से होने वाले भू-कटाव (Soil Erosion) पर रोक लगेगी।
बैठक में सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता राजीव श्रीवास्तव, संजय शुक्ल, लोनिवि के मुख्य अभियंता पीएस बृजवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।





