नैनीताल DM का बड़ा आदेश: राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में निजी अस्पतालों की भागीदारी अनिवार्य; नियमों की अनदेखी पर होगी सख्त वैधानिक कार्रवाई! 👇
नैनीताल: उत्तराखंड में जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर नैनीताल जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जनपद के अंतर्गत संचालित सभी पंजीकृत निजी चिकित्सालयों, नर्सिंग होम, डे-केयर सेंटरों, पॉलीक्लिनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के लिए एक बेहद सख्त और विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। जिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा एवं संवर्धन शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में सभी क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट को राष्ट्रीय और राज्य स्तर के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में अपनी सक्रिय भागीदारी शत-प्रतिशत सुनिश्चित करनी होगी।
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क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत जारी हुई एडवाइजरी, नियमों का पालन अनिवार्य
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) नैनीताल और जनपद के सभी निजी चिकित्सा संस्थानों को भेजी गई इस आधिकारिक एडवाइजरी में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक चिकित्सा संस्थान का यह नैतिक, सामाजिक और व्यावसायिक दायित्व है कि वह सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में सहयोग दे। जिलाधिकारी श्री रयाल ने कहा कि Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act, 2010 तथा उत्तराखंड राज्य में लागू इसके विशेष प्रावधानों के अनुसार, सभी पंजीकृत निजी चिकित्सा संस्थानों को शासन एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन करना होगा। इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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निजी चिकित्सालयों और सेंटरों को इन 5 मुख्य निर्देशों का करना होगा पालन:
जिलाधिकारी ने अपनी एडवाइजरी में सभी निजी चिकित्सा संस्थानों से अपेक्षा करते हुए निम्नलिखित कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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टीकाकरण के प्रति जागरूकता: अपने संस्थान में आने वाले पात्र लाभार्थियों को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम, पल्स पोलियो अभियान और अन्य जनस्वास्थ्य योजनाओं के प्रति अनिवार्य रूप से जागरूक करें।
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मरीजों को रेफर करना: यदि आवश्यकता हो, तो मरीजों को ससमय निकटतम सरकारी टीकाकरण केंद्र अथवा सरकार द्वारा अधिकृत स्वास्थ्य इकाई के लिए संदर्भित (Refer) करें।
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अभियानों में सहभागिता: स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर संचालित किए जाने वाले विशेष अभियानों, स्वास्थ्य मेलों, जन-जागरूकता कार्यक्रमों और संक्रामक रोग नियंत्रण गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लें।
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HMIS पोर्टल पर नियमित अपडेट: भारत सरकार के HMIS (Health Management Information System) पोर्टल पर अपने चिकित्सालय से संबंधित सभी आवश्यक और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सूचनाओं का नियमित व समयबद्ध डिजिटल अपडेशन (Update) सुनिश्चित करें।
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सटीक रिपोर्टिंग और समन्वय: किसी भी प्रकार के अधिसूचित रोगों (Notified Diseases) एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े संवेदनशील मामलों की रिपोर्टिंग निर्धारित नियमों के अनुसार तुरंत विभाग को दें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति (Health Emergency) में जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के साथ चौबीसों घंटे समन्वय बनाए रखें।
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लापरवाह संस्थानों पर पैनी नजर, सक्षम प्राधिकारी करेंगे औचक निरीक्षण
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी है कि जनपद के सभी पंजीकृत क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट का समय-समय पर औचक निरीक्षण (Inspection), अनुश्रवण और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने का पूरा विधिक अधिकार सक्षम प्राधिकारी को प्राप्त है। यदि कोई भी निजी अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर नियमों की अवहेलना करता हुआ या सरकारी अभियानों में असहयोग करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ संबंधित अधिनियमों, नियमों और शासनादेशों के तहत तत्काल कड़ी दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने अंत में कहा कि सभी निजी संस्थान जनहित को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन के साथ मिलकर एक सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने में अपना योगदान दें।
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