देवभूमि जन हुंकार, ऋषिकेश / देहरादून: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी के सपने को साकार करती देश की सबसे महत्वपूर्ण और सामरिक ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से एक बहुत बड़ी और गौरवशाली उपलब्धि सामने आ रही है। परियोजना के तहत ढालवाला से शिवपुरी के बीच बनाई जा रही पहली टनल की निकास सुरंग शुक्रवार को सफलतापूर्वक आर-पार (ब्रेकथ्रू) हो गई है। सुरंग के आर-पार होते ही निर्माण कार्य में जुटी कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई, और सभी ने हाथों में तिरंगा लेकर इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न मनाया।
यह रेल परियोजना कुल 125 किलोमीटर लंबी होगी, जिसके तहत 12 नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे। परियोजना में यात्री ट्रेनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा, जबकि मालगाड़ियों की अधिकतम गति 65 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इसके अलावा परियोजना के अंतर्गत कुल 19 पुलों का निर्माण किया जाएगा तथा मुख्य और निकास सुरंगों की कुल लंबाई 213 किलोमीटर होगी। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में आवागमन और सफर अधिक सुगम होगा। साथ ही, चारधाम यात्रा को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से भी यह परियोजना देश को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगी।
सबसे जटिल और संवेदनशील हिस्से में मिली कामयाबी
प्राप्त विवरण के अनुसार, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में कुल 28 सुरंगें बनाई जा रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए मुख्य सुरंगों के समानांतर निकास सुरंगें भी तैयार की जा रही हैं, ताकि किसी भी आपदा या आपात स्थिति में इनका उपयोग किया जा सके। इन निकास सुरंगों के भीतर एंबुलेंस और छोटे वाहन आसानी से आ-जा सकते हैं, जबकि मुख्य सुरंग से ट्रेनों का नियमित आवागमन होना है। राहत की बात यह है कि इस परियोजना की कुल 28 में से 22 सुरंगों का निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है।
परियोजना की पहली सुरंग ढालवाला से शिवपुरी तक करीब 10 किलोमीटर लंबी है। इसमें नीर गडडू से शिवपुरी वाले हिस्से का काम तो पहले ही हो चुका था, लेकिन ढालवाला से नीर गडडू के बीच सुरंग की खोदाई में सबसे अधिक तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं। यह पूरा हिस्सा परियोजना का सबसे जटिल और संवेदनशील हिस्सा माना जाता है, जहाँ बहुत बड़ी भूगर्भीय दरारें मौजूद हैं। इसके अलावा अलग-अलग हिस्सों में सुरंग के भीतर सक्रिय जलस्रोत भी थे, खासतौर से खारास्रोत और नीर क्षेत्र में कई पानी के स्रोत थे।
इंजीनियरों की सूझबूझ से पूरा हुआ चुनौतीपूर्ण कार्य
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और सुरंग खोदाई का काम संभाल रही मैक्स इंफ्रा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के इंजीनियरों ने बेहद सावधानी और तकनीकी दक्षता के साथ इस चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम दिया। आखिरकार शुक्रवार शाम तीन बजे करीब 5.5 किलोमीटर लंबी निकास सुरंग को सफलतापूर्वक आर-पार कर दिया गया।
सफलता के बाद कंपनी के परियोजना प्रबंधक निशीथ शर्मा ने बताया कि इस निकास सुरंग में कई गंभीर भूगर्भीय जटिलताएं थीं, जिन्हें टीम ने सफलता से पार कर लिया है। वहीं RVNL के उप महाप्रबंधक सिविल ओपी मालगुड़ी ने बताया कि निकास सुरंग के ब्रेकथ्रू के बाद अब मुख्य सुरंग को आर-पार करने की तैयारियों को और अधिक तेज कर दिया गया है।
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