नगर पालिका परिषद भवाली
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बेजुबानों के ‘जीवन-जल’ पर प्रशासनिक आदेश भी बेअसर, पालिका की सुस्ती पर भड़के जागरूक नागरिक! 👇

भवाली: उत्तराखंड की देवभूमि में सड़कों पर भटक रहे बेजुबान जानवरों की प्यास बुझाने के लिए भवाली के एक जागरूक नागरिक, आशीष कुमार तिवारी, पिछले काफी समय से एक निरंतर और संघर्षपूर्ण मुहिम चला रहे हैं। भीषण गर्मी और बढ़ती समस्याओं के बीच, आशीष ने न केवल व्यक्तिगत स्तर पर पानी की ‘होदियों’ (Drinking Troughs) का निर्माण कर एक अनूठी मिसाल पेश की है, बल्कि इस दिशा में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए एक बड़ी सामाजिक और विधिक लड़ाई भी लड़ी है।

इस महत्वपूर्ण मुहिम की शुरुआत इस चिंता के साथ हुई थी कि सड़कों पर प्यास से बेहाल भटक रहे बेजुबान पशुओं को पानी की एक बूंद भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। आशीष ने इसे केवल एक सामान्य सामाजिक मुद्दा न मानकर अपना प्राथमिक नागरिक कर्तव्य समझा। उन्होंने इस विकट समस्या के समाधान के लिए नगर पालिका से लेकर जिला प्रशासन तक लगातार पत्राचार किया और धरातल की वास्तविक स्थिति से अधिकारियों को अवगत कराया।

एसडीएम (SDM) का बड़ा आदेश: हर 500 मीटर पर बनानी होगी पानी की होदी

आशीष के इस निरंतर संघर्ष और प्रमाणिक शिकायतों का परिणाम यह रहा कि प्रशासन को इस पर संज्ञान लेना पड़ा। एसडीएम (SDM) कार्यालय और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा नगर पालिका परिषद, भवाली को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इन आदेशों के अनुसार, नगर पालिका को नगर क्षेत्र में प्रत्येक 500 मीटर की दूरी पर बेजुबान जानवरों के लिए पानी की होदियों का निर्माण करना अनिवार्य किया गया है।

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प्रशासनिक सुस्ती पर आशीष का सवाल: “सहयोग को तैयार, पर काम पालिका का है”

भले ही प्रशासनिक स्तर से आदेश जारी हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर काम की गति अत्यंत धीमी है, जिसे लेकर जनता में रोष है। प्रशासन द्वारा बार-बार आशीष से ही जगह चिन्हित करने की मांग की जा रही है, जिस पर आशीष ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा, “नगर पालिका यह न भूले कि यह उनका वैधानिक दायित्व है, कोई निजी कार्य नहीं। हम प्रशासन का सहयोग करने के लिए हर समय तैयार हैं, लेकिन व्यवस्था बनाने की मुख्य जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की ही है।”

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गौशाला संचालन हेतु 25 नाली पैतृक जमीन देने का बड़ा संकल्प

अपनी इस मुहिम को एक कदम और आगे बढ़ाते हुए, आशीष कुमार तिवारी ने एक बड़ी और सराहनीय पहल की है। उन्होंने अल्मोड़ा जिले में स्थित अपनी पैतृक भूमि में से 25 नाली जमीन को बेजुबान जानवरों की सेवा के लिए एक गौशाला परियोजना के रूप में विकसित करने की पेशकश की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस जमीन को स्वयं संचालित करने (या गौशाला हेतु संचालित करने देने) के लिए पूरी तरह तैयार हैं, ताकि इन बेजुबानों को एक स्थाई ठिकाना और सहारा मिल सके।

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जागरूक नागरिक की अपील: “अब प्रशासन को समझनी होगी जवाबदेही”

आशीष का कहना है, “यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं है, यह हर उस बेजुबान की है जो अपनी प्यास बोलकर नहीं बता सकता। मैं अपनी निजी जमीन तक देने को तैयार हूँ, अब प्रशासन को अपनी जवाबदेही समझनी होगी और जारी आदेशों का पालन करते हुए युद्धस्तर पर होदियों का निर्माण और गौशाला के लिए ठोस विधिक कदम उठाने होंगे।”

यह प्रेस नोट भवाली प्रशासन के समक्ष एक स्पष्ट संदेश है कि नागरिक अपने स्तर पर हर संभव त्याग और प्रयास कर रहा है, अब बारी नगर पालिका और जिला प्रशासन की है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें।

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